सरकार ने रफाल डील में बचाए 25 अरब रुपये, रफाल के आगे पाकिस्तान बेदम

नई दिल्ली (23 सितंबर): इंडिया और फ्रांस के बीच जो रफाल डील हुई है उसके मुताबिक पैकेज में वेपन सिस्टम, सभी स्पेयर्स और अगले पांच सालों तक जो भी परफोर्मेंस बेस्ड लॉजिस्टिक रिक्यार्मेंट्स होंगी वो शामिल हैं। इसे बढ़ाकर 12 साल तक किया जा सकता है।

सौदे में कीमतों को कम किया गया है और पैनाल्टी को और कड़ा किया गया है। रफाल डील में जो पहले सौदा हो रहा था उससे ज्यादा कंपोनेंट्स शामिल हैं। किसी भी समय एअरक्रॉफ्ट की उपलब्धता 75 प्रतिशत ज्यादा होगी जो किसी और एअरक्रॉफ्ट डील से ज्यादा है।

जो वेपन हैं वो भी पहले की गईं नेगोशियेशन से बेहतर हैं। इसमें बियोंड विजुअल रेंज मिसाईल शामिल हैं। इसमें मटियोर मिसाईल की रेंज पहले ऑफर की गईं मिसाईल से कहीं ज्यादा। इससे वायुसेना को एअर सुपीरियारिटी और स्ट्राईकिंग केपेबिलिटी में बढ़ोत्तरी होगी।

सौदे की कीमत में 3 पायलट, 6 क्रू मेंबर्स, 1 इंजीनियर और 6 टेकनीशियन की ट्रेनिंग शामिल है। विमान में इंडिया स्पेसीफिक एनहांसमेंट होगें। जैसे हेलमेट माउंटेड डिस्पले, अकेले पायलट की जरूरत के मुताबिक क्षमताओं को बढ़ाया गया है।

एअरक्रॉफ्ट का टर्न अराउंड़ टाईम काफी कम हैं यानि जहां दूसरे विमान 24 घंटे में जहां केवल तीन सॉर्टी करते हैं, वहीं रफाल विमान एक दिन में 5 सॉर्टी कर सकेगा। रफाल विमान में इंडिया स्पेशिफिक 11 जरूरतों के बाद लेह जैसी ठंड़ी जगहों पर रफाल विमान कोल्ड स्टार्ट कर सकता है। स्पेशल जामर्स हैं। लो रड़ार जामिंग है, रडार वार्निंग जामर्स, रेडियो अल्टीमीटर, डॉप्लर शार्पनर,  इंफ्रारेड सर्च एंड ट्रैक मिसाईल वार्निंग सिस्टम और डिकोय मिसाईलें शामिल हैं।

रफाल विमान सौदे में 50 प्रतिशत ऑफसेट क्लॉज का प्रावधान है। इस ऑफसेट में मेक इन इंडिया कंपोनेंट है। ऑफसेट का 50 से 74 प्रतिशत भारत से आयात करना होगा। रफाल विमान 7.8 अरब यूरो में फाईनल हुआ है। इसका मतबल है कि तकरीबन 3 अरब यूरो का भारत अगले 6 सालों में निर्यात कर सकेगा। सूत्रों के मुताबिक इस सौदेबाजी में 328 मिलियन यूरो की बचत की गई है।

ऑफसेट के 6 प्रतिशत टैक्नीकल कंपोनेंट शेयरिंग के लिए भी प्रावधान किया गया है जिसके लिए रफाल की निर्माता कंपनी डसाल्ट एवियेशन को किसी इंडियन कंपनी से ज्वाईंट वेंचर करना होगा। हालांकि डसाल्ट कंपनी ने इस पर अभी निर्णय नहीं लिया। भारत को कम से कम अगले पांच साल तक रफाल विमान की रख-रखाव पर कोई खर्च नहीं करना होगा। साथ ही स्पेयर पार्ट की कोई समस्या नहीं होगी। अगर कीमतों को देखा जाए तो सिर्फ एअरक्रॉफ्ट अकेल 90 मिलियन यूरो का पडेगा। इसमें सिमुलेटर वॉरंटी अगले 10 सालों के लिए है।

रफाल विमान चूंकि गवरमेंट टू गवरमेंट एग्रीमेंट पर हुआ है, इसी वजह से इसमें इंटीग्रिटी पैक्ट नहीं है। रफाल सौदे की राशि अलाईंड़ कॉस्ट है। इंफ्लेशन को एक्चुअल इंडाईसिस पर मापा गया है। ये हालांकि अभी 3.5 प्रतिशत रखा गया है, लेकिन ये एक्चुअल बेसिस पर ही मापा जायेगा। रफाल विमान की डिलीवरी अगले 36 महीनों में शुरू होगी और 67 महीनों के अंदर सभी रफाल लड़ाकू विमान डिलीवर होंगे। ये डिलीवरी प्रस्तावित डिलीवरी से 5 महीने पहले होगी।

रफाल के लिए भारत सरकार को सौदे की राशि का 15 प्रतिशत पहले, 25 प्रतिशत 12 महीनों के से 18 महीनों के बाद और बाकी डिलीवरी पर दिया जाना है। जेन्स मैग्जीन के मुताबिक 4 टन का रफाल विमान की फ्लाईट रेडियस 750 से 1055 किलोमीटर है। यानि ये दुश्मन की टैरीटरी में अंदर तक पिन पॉइंटेड जाकर मार कर सकता है। भारत जो 36 रफाल ले रहा है। उसमें 28 सिंगल इंजन रफाल होगें और 8 ट्विन इंजन ट्रेनर लडाकू विमान होंगें।