नौकरी बचाने की लड़ाई लड़ रही देश की पहली ट्रांसजेंडर सैनिक

नई दिल्ली(31 अगस्त): भारत की पहली ट्रांसजेंडर सैनिक अपनी नौकरी बचाने की लड़ाई लड़ रही है। शाबी पैदाइशी पुरुष था और उसका नाम एमके गिरी था, लेकिन बाद में वह अपना सेक्‍स चेंज कराकर महिला बन गया। 

- नेवी ने शाबी को नौकरी से निकालने के लिए डिफेंस मिनिस्ट्री से सिफारिश की है। 

- शाबी ने 7 साल पहले ईस्टर्न नेवल कमांड का मरीन इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ज्वाइन किया था। 

- शाबी ने आरोप लगाया है कि नेवी में उसे मेंटली हैरस किया गया और मेंटली अनफिट साबित करने की कोशिश की गई।

-  शाबी ने एक इंटरव्यू में बताया, "जब नेवी को मेरी सेक्स रिअसाइन्मेंट सर्जरी के बारे में पता चला, तो उस वक्त किसी ने इस पर एतराज नहीं जताया था, न ही किसी ने कोई भेदभाव किया था।"

- "मैं जन्म के कुछ साल बाद से ही पुरुष रूप में असहज महसूस करती थी, लेकिन ट्रांसजेंडर के रूप में आने के लिए साहस चाहिए था, इसे जुटाने में कुछ वक्त लगा और जब मैंने नेवी के डॉक्टरों से इस बारे में मदद मांगी तो उन्होंने इनकार कर दिया।" 

- "कुछ समय तक इंतजार करने के बाद 2016 में मैंने विजाग में डॉक्टरों से कॉन्टेक्ट किया और बाद में मेरे 'जेंडर आइडेंटिटी डिसऑर्डर' का निदान किया गया। मेरे पास कोई और रास्ता नहीं था, इसलिए मैंने 22 दिनों की छुट्टी ली और फिर दिल्ली में सेक्स रिअसाइन्मेंट सर्जरी कराई।"

- शाबी ने बताया, "सर्जरी कराने के बाद मैं विशाखापट्टनम में नेवल बेस पर काम पर लौट गई। लेकिन वहां मुझे यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन हो गया। जिसके बाद मुझे सेक्स चेंज ऑपरेशन की जानकारी देने को मजबूर किया गया। सेक्स चेंज कराने के बावजूद मुझे मेल वार्ड में सैनिकों के साथ रहने को कहा गया।"

- "मुझे 6 महीने तक psychiatric वार्ड में रखा गया और मेंटली हैरस भी किया गया। नेवी के डॉक्टरों ने सर्विस के लिए मुझे मेंटली अनफिट साबित करने की कोशिश की, मगर वे फेल रहे।"