ब्रहमोस मिसाइल से हमला करने में सक्षम है पहली इंडियन पनडुब्बी, ये है इसमें खास

मुंबई (2 मई): नौसेना की रडार से बच निकलने में सक्षम पहली स्वदेश निर्मित स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी कलवरी रविवार को समुद्री परीक्षण के लिए मुंबई हार्बर से रवाना हो गई। 

इसकी मदद से सेना पाकिस्तान के समंदर के रास्ते पर नजर रख सकेगी। हालांकि इस पनडुब्बी के लिए भारी वजन वाले टॉरपीडो खरीदने की योजना वीवीआइपी हेलीकॉप्टर सौदे के घोटाले के कारण अटक गई है। सितंबर के अंत तक इसके नेवी में शामिल होने की संभावना है। नौसेना के एक अधिकारी ने कहा कि कलवरी का समुद्री परीक्षण रविवार को शुरू हो गया है। यह हम सब के लिए गौरवपूर्ण क्षण है।  

सरकार के मिशन 2020 के तहत ऐसी पांच और पनडुब्बियों का निर्माण होना है। बता दें कि यह प्रोजेक्ट अपने तय समय से चार साल की देरी से चल रहा है।

पनडुब्बी के आंकड़े > 67 मीटर है लंबाई और 6.2 मीटर मोटाई। > 1565 टन भार ले जाने में सक्षम। > 37 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पानी में चलेगी। > 22 किमी प्रति घंटे की रफ्तार सतह पर। > 40 से 50 दिन तक पानी में रहने की क्षमता। > इनकी औसत उम्र 25 साल है।  > 12000 किमी तक दूरी कर सकती है तय। 

क्या है खास > ब्रहमोस मिसाइल से हमला करने में सक्षम है। > पानी के भीतर और बाहर दोनों जगह से हमला करने में सक्षम। > मुख्य रूप से ये युद्धक पनडुब्बियां हैं।