2030 तक भारत चांद से ले सकता है जरूरत की एनर्जी

नई दिल्ली(19 फरवरी): भारत 2030 तक अपनी जरूरत की एनर्जी चांद से हासिल कर सकता है। यह दावा इसरो के एक साइंटिस्ट ने किया है। उनका कहना है कि यह चांद पर पाए जाने वाले हीलियम-3 मैटर से मुमकिन होगा।

- इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) के प्रोफेसर सिवाथनु पिल्लई कहा कि चांद की मिट्टी को निकालकर धरती पर लाना इसरो की प्रायोरिटी में शामिल है।

- उन्होंने बताया कि चांद की मिट्टी में हीलियम-3 भरपूर है। इतनी, कि उससे पूरी दुनिया की एनर्जी की जरूरत पूरी हो सकती है।

- वो ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) के प्रोग्राम- कल्पना चावला स्पेस पॉलिसी डायलॉग में बोल रहे थे।

- ब्रह्मोस एयरोस्पेस के चीफ रहे प्रो. पिल्लई ने कहा कि दूसरे देश भी इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।

- प्रो. पिल्लई ने कहा, "कुछ दशकों के बाद लोग चांद पर हनीमून मनाने जाने लगेंगे।"

- इस मौके पर इंडियन आर्मी में पर्सपेक्टिव प्लानिंग के डीजी लेफ्टिनेंट जनरल पीएम बाली ने कहा कि GSAT-7 भारत का पहला सेना को डेडिकेटेड सैटेलाइट है।

- इसके जरिए बाहरी स्पेस से देश की सिक्युरिटी पर नजर रखी जा रही है।

- यह हीलियम का आइसोटॉप है, जिसे एनर्जी में बदला जा सकता है।

- सूर्य में हो रही फ्यूशन रियेक्शन में हाईड्रोजन लगातार हीलियम में बदल रहा है, जिससे एनर्जी जनरेट हो रही है।

- इसी तरह अगर हीलियम में फ्यूशन रियेक्शन कराई जाए तो यह हीलियम-2 में बदलेगा। इससे एनर्जी जनरेट होगी।