युद्ध किया तो बर्बाद हो जाएगा चीन, भारत को मिलेगा इन देशों का साथ


नई दिल्ली (18 अगस्त): भारत के खिलाफ 'भूमाफिया' चीन की चालबाजी अब उसी पर भारी पड़ता जा रहा है। डोकलाम के मुद्दे पर चीन को भारत की ओर से इस तरह के विरोध की उम्मीद नहीं थी और चीन बदलते भारत को कमतर कर आंकने की गलती कर बैठा। अब उसे समझ में नहीं आ रहा है कि वो डोकलाम के विवाद को कैसे सुलझाए। लिहाजा वो लगातार भारत को युद्ध की धमकी दे रहा है।

चीन की ओर से भारत को लगातार मिल रही धमकियों के बीच डोकलाम विवाद पर भारत की कुटनीति अब रंग लाने लगी है और इस मसले पर चीन लगातार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर घिरता जा रहा है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों के बाद अब जापान ने भी डोकलाम के मुद्दे पर भारत का समर्थन किया है। 

जापान के राजदूत केंजी हीरामत्सू ने कहा है कि इससे पूरे क्षेत्र की स्थिरता प्रभावित हो सकता है, ऐसे में हम इस पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चीन और भूटान के बीच इस क्षेत्र को लेकर विवाद है। जहां तक भारत की भूमिका की बात है, तो हम मानते हैं कि वह भूटान के साथ अपने द्विपक्षीय समझौते के आधार पर ही इस मामले में दखल दे रहा है।

वहीं अमेरिका पहले ही डोकलाम विवाद के लिए चीन को जिम्मेदार बता चुका है। अमेरिका का कहना है कि भारत उसका अच्छा दोस्त है और चीन को इस मुद्दे को बातचीत के जरिए सुलझाना चाहिए। गौरतलब है कि चीन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख कड़ा रहा है, क्योंकि अमेरिका की नाक में दम करने वाले नॉर्थ कोरिया के लिए चीन हमेशा ही नरम रुख अपनाता रहा है।

उधर ऑस्ट्रेलिया ने चीन को डोकलाम मुद्दे पर संयम बरतने और भारत से बातचीत के जरिए विवाद को सुलझाने की सलाह दी है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया दक्षिणी चीन सागर को लेकर चीन की दादागिरी को लेकर भी चेतावनी जारी कर चुका है। इस मुद्दे पर ऑस्ट्रेलिया ने चीन की सैन्य महत्वकांक्षाओं का विरोध किया है।

डोकलाम विवाद पर भारत को वियतनाम का भी साथ मिला है। दरअसल दक्षिणी चीन सागर में विवाद को लेकर वियतनाम की चीन से हमेशा ही ठनी रही है, इसके अलावा भारत ने उसकी लगातार मदद की है। भारत वियतनाम को आकाश मिसाइल देने पर भी विचार कर रहा है, वहीं सुखोई 30 एमकेआई लड़ाकू विमानों भी प्रशिक्षण देगा।

इतना ही नहीं डोकलाम के मुद्दे पर यूरोप के ताकतवर देशों का साथ भारत को मिलता दिख रहा है। भारत का फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन से काफी अच्छे रिश्ते हैं। इन देशों ने कई मुद्दों पर भारत का खुलकर साथ दिया है। सयुंक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इन सभी देशों ने भारत का स्थाई सीट के लिए साथ दिया है, वहीं चीन भारत के खिलाफ रहा है।