चीन को भारत का जवाब, पूर्वी सेक्टर में तैनात करेगा 'विध्वंसक' राफेल

नई दिल्ली (7 जनवरी): चतुर चीन भारत के खिलाफ चालबाजी से बाज नहीं आ रहा है। अब भारत ड्रैगन को उसी की भाषा में जवाब दे रहा है। भारत फ्रांस से खरीदे गए अत्याधुनिक राफेल फाइटर जेट्स के पहले स्क्वाड्रन का बेस ईस्टर्न सेक्टर में बनाने जा रहा है। राफेल फाइटर जेट्स न्यूक्लियर हथियारों को ढोने में सक्षम है।

दरअसल, भारत यह कदम की उस नीति का हिस्सा है, जिसके तहत चीन को जवाब देने के लिए पारंपरिक और न्यूक्लियर, दोनों तरह के हमलों की क्षमता को मजबूत करना है।

आपको बता दें कि भारत पहले ही सुखोई-30MKI फाइटर जेट्स की तैनाती असम के तेजपुर और छाबुआ में कर चुका है। अब भारतीय वायु सेना ने योजना बनाई है कि 2019 के आखिर तक पहले 18 रफाल लड़ाकू विमानों को पश्चिम बंगाल के हाशिमपुरा बेस पर तैनात किया जाएगा।

भारतीय वायुसेना ने 10 दिन पहले ही अरुणाचल के सियांग जिले स्थित टूटिंग में भी अडवांस लैंडिंग ग्राउंड (एएलजी) को शुरू कर दिया है। पूर्वी लद्दाख के अलावा अरुणाचल में शुरू किया गया यह छठा एएलजी है। इन सभी को शुरू करने का फैसला चीन के मद्देनजर लिया गया है। इसके अलावा, बंगाल के पानागढ़ बेस पर भी जल्द ही छह C-130J हरक्यूलिस एयरक्राफ्ट तैनात किए जाएंगे। पानागढ़ सेना के लिए नए बने 17 माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स का हेडक्वॉर्टर बनने जा रहा है