भारत OBOR को स्वीकार नहीं करेगा, ये सॉवेरीनटी का वॉयलेशन है: विदेश मंत्रालय


नई दिल्ली(14 मई): भारत चीन के बेल्ट-वन रोड (OBOR) प्रोजेक्ट को स्वीकार नहीं करेगा। भारत की ओर से जारी अधिकारिक बयान में कहा गया है कि वह चीन में OBOR प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं बनेगा। ये भी कहा कि भारत ऐसे किसी प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं बनेगा जो उसकी सॉवेरीनटी (संप्रभुता) और टेरिटोरियल इंटीग्रिटी (क्षेत्रीय अखंडता) का वॉयलेशन करता हो।


-  बता दें कि चीन की दो दिन की OBOR समिट रविवार से शुरू हो रही है। इसमें पाकिस्तान समेत 29 देश शामिल हो रहे हैं।


- भारत चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) पर आपत्ति जता चुका है। पाक के ग्वादर पोर्ट से शुरू होकर चीन के शिनजियांग तक जाने वाला कॉरिडोर गिलगित-बाल्तिस्तान और पाक के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से गुजरेगा। भारत, पीओके समेत पूरे जम्मू-कश्मीर पर अपना हक मानता है।


- समिट शुरू होने से ठीक पहले भारत की फॉरेन मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन गोपाल बागले ने कहा कि इस मामले में हमारा रुख एकदम साफ है। चीन से हम कहना चाहते हैं कि वह कनेक्टिविटी से जुड़े अपने इनीशिएटिव को लेकर बातचीत करे। वन बेल्ट-वन रोड (OBOR) का नाम बदलकर बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव (BRI) कर दिया गया। हम चीन के रिस्पॉन्स का इंतजार कर रहे हैं।


- बागले के मुताबिक CPEC, बीआरई के तहत आने वाला एक फ्लैगशिप प्रोग्राम है। इस मामले पर इंटरनेशनल कम्युनिटी को भी भारत की पोजिशन पता है। कोई भी देश अपनी सॉवेरीनटी और टेरिटोरियल इंटीग्रिटी को नजरअंदाज कर किसी प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं बन सकता।


- "भारत का मानना है कि देशों को जोड़ने वाले किसी प्रोजेक्ट को इंटरनेशनल नॉर्म्स, कानून, गुड गवर्नेंस, खुलापन, ट्रांसपेरेंसी और इक्वलिटी पर आधारित होना 

चाहिए।"


- "भारत कई देशों और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशंस के साथ फिजिकल और डिजिटल कनेक्टिविटी पर काम कर रहा है।"