जेटली के जवाब से पगलाया चीन, कहा- हम भी 1962 वाले नहीं

बीजिंग (3 जुलाई): भारत और चीन के बीच सिक्किम बॉर्डर पर लगातार तनातनी बढ़ती जा रही है। चीन के कड़े तेवर के बाद भारत ने जहां सिक्किम में सेना का जमावड़ा बढ़ा दिया है। वहीं ड्रैगन भारत के इस कदम से और चिढ़ गया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने भारतीय रक्षा मंत्री के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है जिसमें अरुण जेटली ने कहा था कि अब भारत के हालात 1962 के जैसे नहीं है। शुक्रवार को रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने चीन को चेतावनी भरे लहज़े में संदेश देते हुए कहा था कि 2017 का भारत 1962 की तुलना में काफी अलग है।


अरुण जेटली का बयान चीन की ओर से मिली धमकी के बाद आया था जिसमें उसने कहा था कि भारत को 1962 में मिला सबक याद रखना चाहिए। इस पर प्रतिक्रिया में जेटली ने डोकलम के मसले पर बने गतिरोध पर भी स्थिति साफ की थी। उन्होंने बताया कि डोकलम में चीन की ओर से बनाई जा रही सड़क का सबसे पहले 16 जून को भूटान की रॉयल आर्मी ने विरोध किया था। दो दिन बाद भारत ने भूटान की सेना को अपना समर्थन दिया।


रक्षा मंत्री अरुण जेटली इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करके कहा है कि बहुत हद तक यह सही है कि 1962 के मुकाबले 2017 में भारत काफी बदल चुका है। लेकिन यह बात चीन पर भी लागू होती है। वह भी पहले जैसा नहीं रहा है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने भूटान संबंधी में भारत के बयान को भी ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि भूटान को तो पहले पता ही नहीं था कि भारतीय फौज़ डोका ला (डोकलम) तक आ गई है। वह भूटान की आड़ लेकर चीन की सीमा में घुसपैठ कर रहा है।


इन सबके बीच खबर आ रही है इस सप्ताह के अंत में पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात जर्मनी के हैम्बर्ग में जी-20 के सम्मेलन के दौरान हो सकती है। यह सम्मेलन 7 और 8 जून को आयोजित हो रहा है। चीनी विदेश उपमंत्री ली बाओडोंग के मुताबिक सामान्य परंपरा के तहत हर जी-20 सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, इंडिया, चाइना, साउथ अफ्रीका) देश भी अनौपचारिक बैठक करते हैं। यह बैठक भी उसी तरह की होगी।