'धमकी देने वाला चीन युद्ध नहीं चाहता'

नई दिल्ली(7 अगस्त): डोकलाम में भारत और चीन की सेनाएं पीछे हटने को तैयार नहीं है। चीन आए दिन भारत का युद्ध की धमकी देकर दवाब बनाने की कोशिश कर रहा है।  लेकिन भारत के सुरक्षा प्रतिष्ठान को इस बात का भरोसा है कि चीन जुबानी तीर भले चला रहा हो, लेकिन वह भारत के साथ युद्ध का जोखिम नहीं उठाएगा, न ही किसी छोटे स्तर सैन्य ऑपरेशन को अंजाम देगा।

- एक अंग्रेजी अखबार ने सूत्रों के हवालों से लिखा कि दोनों देशों के लिए अपनी-अपनी 'प्रतिष्ठा बचाने' का एक उपाय यह हो सकता है कि दोनों के एक साथ डोकलाम से अपनी सेनाओं को वापस बुला लें। 

- हालांकि सूत्रों ने यह भी कहा कि अगर युद्ध की नौबत आती भी है, तो भी भारतीय सेना उसके लिए पूरी तरह तैयार है और वह चीन के किसी भी हमले का जवाब देने में सक्षम है।

- डोकलाम में गतिरोध को 50 से ज्यादा दिन बीत चुके हैं और भारत ने कई बार जोर देकर कहा है कि युद्ध इस समस्या का हल नहीं है। खुद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में कहा कि द्विपक्षीय वार्ता, धैर्य और भाषा का संयम ही तनाव को दूर करने का काम कर सकते हैं।

-एक सूत्र ने कहा, 'दोनों देश टकराव नहीं चाहते। डोकलाम में चीनी सैनिकों ने सड़क निर्माण की कोशिश की और भारतीय सैनिकों ने उसे रोक दिया। इसके बाद स्थिति बिगड़ती चली गई और तनवा बढ़ता गया। ऐसे में अब दोनों देश एक साथ अपने सैनिक पीछे हटाने को राजी हो जाते हैं तो दोनों की प्रतिष्ठा बची रहेगी।'

- हालांकि चीन की ओर से अभी तक सिर्फ आक्रामक भाषा का ही इस्तेमाल किया गया है। कम से कम सार्वजनिक तौर पर तो यही लगता है। डोकलाम विवाद का असर अक्टूबर में भारत और चीन की सेना के बीच होने वाले सैन्य अभ्यास पर पड़ सकता है।

- एक अन्य सूत्र ने कहा, 'इस अभ्यास को लेकर शुरुआती प्लानिंग संबंधी कॉन्फ्रेंस भी अभी तक नहीं हो पाई है, जबकि इस संबंध में चीन को कई बार याद दिलाया जा चुका है।'