चीन की कमजोरी बनी एशिया में भारत की ताकत

नई दिल्ली(1 सितंबर): चीन को टक्कर देते हुए भारत अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत ने एशिया में अपनी खोई हुई जमीन वापस पा ली है। भारत अपनी रणनीतिक सूझ-बूझ से नेपाल, श्रीलंका और मालदीव जैसे देशों में अपनी खोई हुई साख को दोबारा हासिल करने में कामयाब हो सकता है।    - एशियाई देशों में खुद को एक दूसरे से बेहतर दिखाने के लिए चीन और भारत के बीच होड़ कोई नई बात नहीं है। चीन की कमजोरी है कि वह किसी भी देश के शीर्ष नेतृत्व से डील करने का कोई मौका नहीं गवांता हैं। बता दें कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब भारत के चीन से थोड़ो अच्छे संबंध हैंं। चीन ने पड़ोसी देशों में कई भू-क्षेत्रों पर भी कब्जा कर रखा है।   - मालदीव में बढ़त बनाने की कोशिश- मालदीव सरकार ने मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद को सत्ता से बेदखल करने के साथ उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी कर दिया है। लेकिन हाल में मोहम्मद नशीद की वापसी सत्तारूढ़ अब्दुल्ला यामीन की सरकार के लिए चिंता की तरफ इशारा करती हैं।

- बता दें कि 2012 में जब नशीद को अचानक सत्ता से हटाया गया था तब यह भारत के लिए एक अच्छी खबर नहीं थी क्योंकि इससे भारत मालदीव के साथ राजनीतिक संबंधों में बैकफुट पर चला गया था। जिसने चीन को इस छोटे द्वीपीय देश में आगे बढ़ने का मौका दे दिया था।    - नशीद ने अपनी राजनीतिक जीवन में आयी हलचल के बाद ब्रिटेन से वापास श्रीलंका आने का फैसला लिया और राजनीति में बढ़त बनने के लिए कुछ नए कदम भी उठाए हैं। जिसमें भारत ने नशीद का समर्थन किया और अब इससे यामीन के ऊपर दबाब बनेगा और भारत को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।        - मालदीव में विरोधियों ने भारत को मालदीव के हर मामले से दूर रखा और चीन के साथ अपनी दोस्ती बढ़ाई है। यही कारण है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2014 में मालदीव का दौरा किया था। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मालदीव से भारत के संबंध बेहतर करने के लिए इस साल के शुरुआत में ही एक रक्षा सहयोग संधी की थी। लेकिन नशीद के सत्ता में लौटने से परिस्थितियां और भारत के अनुकूल हो सकती हैं। जिससे भारत को फायदा होगा।