इजरायल देगा भारत को अचूक 'ब्रह्मास्त्र', 2 अरब डॉलर का किया बड़ा रक्षा सौदा

नई दिल्ली (7 अप्रैल): भारत और इजरायल के बीच दो अरब अमेरिकी डॉलर यानी करीब 13 हजार करोड़ रुपये का बड़ा रक्षा करार हुआ है। जिसके तहत इजरायल भारत को जमीन से हवा में मार करने वाला मिसाइल SAM सिस्टम देगा। इजरायल की सरकारी रक्षा कंपनी इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) ने इस बात की जानकारी दी। IAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जोसेफ वीस ने एक बयान में कहा है कि IAI भारत सरकार की 'मेक इन इंडिया' नीति के अंतर्गत अपने स्थानीय साझीदारों की सहायता से विकसित करेगा। इसके तहत, मीडियम रेंज वाले बराक-8 SAM सिस्टम विकसित किए जाएंगे। भारतीय सेना के एक रेजिमेंट को 16 लॉन्चरों और 560 मिसाइलों से लैस किया जाएगा। दूसरी डील एक और SAM सिस्टम विकसित करने को लेकर होनी है, जो 40 हजार टन वजन वाले भारतीय एयरक्राफ्ट करियर आईएनएस विक्रांत पर तैनात किया जाना है। इसके अलावा, इजरायल भारत को लॉन्ग रेंज मिसाइल डिफेंस सिस्टम (LRSAM) भी मुहैया कराएगा। इस डील का मकसद नरेंद्र मोदी के जुलाई में प्रस्तावित इजरायल दौरे से पहले दोनों देशों के बीच सामरिक रिश्तों को मजबूती देना है। इससे पहले इजरायल ने भारत को Eitan और Heron-TP ड्रोन देने की पेशकश की थी ये ड्रोन 35 हजार फीट की ऊंचाई से 52 घंटे नजर रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर मिसाइल को दाग कर दुश्मन को तबाह कर सकते हैं। लेकिन भारत 'मेक इन इंडिया' के तहत इजरायल की तकनीक से 'स्वदेशी' ड्रोन विकसित करने के पक्ष में है। जिस पर अभी बातचीत चल रही है और जिसका फैसला जुलाई में पीएम मोदी के इजरायल दौरे के दौरान हो सकता है। गौरतलब है कि पिछले कुछ सालों में रक्षा क्षेत्र में इजरायल भारत का पांचवां बड़ा पार्टनर बन कर उभरा है। यूएवी से लेकर कई छोटे-बड़े हथियार इजरायल भारत को देता रहा है। बराक-8 जैसी जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल भारत 'मेक इन इंडिया' के तहत इजरायल के सहयोग से विकसित कर रहा है। ऐसे में अगर इन दोनों ड्रोन को भारत में बनाने पर सहमति हो जाती है तो ये भारत के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। 


रक्षा क्षेत्र में इजरायल कैसे भारत का अहम साझेदार बना...

- 1990 के मध्य से ही भारत और इजरायल के बीच सैन्य संबंध सबसे अहम रहे हैं।

- दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों की शुरुआत जनवरी, 1992 में हुई थी।

- बीते ढेड़ दशक के दौरान दोनों देशों के बीच क़रीब 670 अरब रुपए का कारोबार हुआ है।

- मौजूदा समय में, भारत सालाना करीब 67 अरब से 100 अरब रुपए के सैन्य उत्पाद इसराइल से आयात कर रहा है।

- इसराइल ने भारत को मई, 2009 और मार्च, 2010 में 73.7 अरब रुपए में अवाक्स प्लेन बेचे थे।

- भारतीय वायुसेना के पास तीन ऑपरेशनल अवाक्स मौजूद हैं।

- इसके अलावा दो अन्य के जल्दी ही वायुसेना में शामिल होने की उम्मीद है।

- हालांकि अमरीका के कहने पर इजरायल ने यह तकनीक चीन को नहीं दी है।

- अभी तक इजरायल भारत को बराक-1, एयर कॉम्बेट मॉनिटरिंग सिस्टम

- दवोरा MK-2 पेट्रोल बोट, यूएवी, नाइट विजन कैमरे, लैसर गाइडेड बम

- मिग उपग्रडिंग तकनीक, आर्म्स एंड एम्युनिशन, अर्ली वार्निग फॉल्कान रडार दिए हैं।


मोदी सरकार के दौरान इजरायल से रिश्ते...

- बीते दो सालों के दौरान, दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण सैन्य समझौते हुए हैं।

- मोदी सरकार के सत्ता में आने के कुछ ही महीनों बाद सितंबर, 2014 में अहम समझौता हुआ।

- भारत ने इसराइली एयरोस्पेस इंडस्ट्री की बराक- एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने की घोषणा की।

- यह डील करीब 965 करोड़ रुपए में की गई, हालांकि यूपीए सरकार के दौरान यह समझौता नहीं हुआ।

- मोदी सरकार भारतीय नौसेना को एंटी बैलिस्टिक मिसाइल से लैस करना चाहती है।

- इसके अलावा इजरायल भारत को 8356 स्पाइक एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल और 321 लॉंचर देगा।

- साथ ही भारत ने इजरायल से 2680 करोड़ रुपए की 10 हेरॉन टीपी यूएवी खरीदने की भी घोषणा की है।

- इसकी मदद से भारतीय सेना की निगरानी करने और टोह लेने की क्षमता काफी बढ़ जाएगी।

- भारत अभी निगरानी और टोह लेने के लिए इसराइल में निर्मित 176 ड्रोन इस्तेमाल कर रहा है।

- दोनों देशों के संयुक्त उपक्रम की सबसे बड़ी कामयाबी है बराक-8 मिसाइल।

- बराक-8 एलआर-एसएएम (70 किलोमीटर की रेंज वाले) मिसाइल है।

- भविष्य में दूसरे देश भी भारत और इसराइल से ये मिसाइल खरीद सकेंगे।


इजरायल के सहयोग से बनाई बराक-8 मिसाइल...

- भारत और इजरायल के संयुक्त सहयोग से निर्मित की गई है बराक-8 मिसाइल।

- हिब्रू भाया में बराक का अर्थ बिजली होता है, बराक भी बिजली की तरह दुश्मन पर हमला करती है।

- मिसाइल दुश्मन की मिसाइल की पहचान कर उसे हवा में ही नष्ट कर देगी।

- बराक-8 जमीन से हवा में 70किमी के दायरे में किसी भी लक्ष्य भेद सकती है।

- बराक-8 मिसाइल की लंबाई 4.5 मीटर है जबकि इसका वजन 275 किलोग्राम है।

- एक सेकेंड में 680 मीटर की दूरी तय करने वाली यह मिसाइल मैक2 की गति से उड़ती है।

- मिसाइल में दो स्तरीय इंजन का प्रयोग किया गया है।

- इसका सर्विलांस सिस्टम काफी एडवांस बताया जा रहा है।

- यह रडार के जरिए खुद खतरा भांप कर इसे गाइड करेगा।

- बराक-8 मिसाइल का सबसे पहला परीक्षण मई 2010 में किया गया था।

- नवंबर 2014 और 2015 में इसके जमीनी और समुद्री वर्जन का परीक्षण किया गया।

- 29 और 30 दिसंबर, 2015 को इसके समुद्री वर्जन को टेस्ट किया जा चुका है, जो नेवी को सौंपा जाएगा।

- बराक8 छोटे एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर और ड्रोन जैसे कम से दूरी के लिए खतरनाक।

- मिसाइल, लड़ाकू विमान और ड्रोन और अन्य खतरों पर रहेगी नजर।

- दिन, रात और सभी मौसमों में एक साथ कई लक्ष्यों को ध्वस्त करने में सक्षम।

- नौसेना पोतों, तटीय रिफाइनरी और अन्य रणनीतिक प्रतिष्ठानों की रक्षा करेगी।

- अत्याधुनिक मल्टी मिशन रडार, और एक आसान कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम।

- भारत-इजरायल को अरबों डॉलर का बराक-8 का सौदा मिलने की उम्मीद।