साथ आए भारत और अमेरिकी कमांडो, अब पाक को मिलेगा मुंहतोड़ जवाब

नई दिल्ली (25 सितंबर): उत्तराखंड के रानीखेत के जंगलों में सुपरपावर अमेरिका के सुपर कमांडो और हिंदुस्तान के जांबाज़ आतंक के खिलाफ लड़ने का अभ्यास कर रहे है। यह युद्धाभ्यास पाकिस्तान को सीधा संकेत है कि अगर अब उसने आतंकी भेजने और माहौल बिगाड़ने की गलती की तो उसे मुंहतोड़ जवाब मिलेगा।

27 सितंबर तक चलने वाले इस युद्धअभ्यास में हर देशों के 225 जवान शामिल हैं। देश के 12-मद्रास रेजिमेंट के जवान शामिल हैं। दोनों देशों की तीनों सेनाएं अलग-अलग युद्ध अभ्यास में हिस्सा ले रही हैं। भारत के सैनिकों के पास कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ से निपटने का अनुभव है और अमेरिकी सैनिकों के पास इराक और अफगानिस्तान के हालातों का। दोनों सेनाएं मिलकर उग्रवादियों की घुसपैठ और आतंकवाद से मुकाबले के लिए एक साथ लड़ने का अभ्यास कर रही हैं।

इस सैन्य अभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे के संगठन संरचना, हथियार, उपकरण और टेक्निकल ड्रिल के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे...

- जंगलों में छुपे आतंकियों का कैसे पता लगाना है - उनका पीछा कर कैसे घेर कर मारना है - आतंकियों के साथ-आमने-सामने की लड़ाई में उन्हें कैसे ढेर करना है - बारूद और lED को कैसे डिटेक्ट करना है - साथ ही आंतकियों द्वारा इस्तेमाल होने वाले लेटेस्ट कम्यूनेशन सिस्टम की जानकारी लेना शामिल है

पूरी तरह आतंकवाद और गृहयुद्ध सरीखे हालात तथा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ऑपरेशन पर आधारित इंडो अमेरिकन संयुक्त सैन्य अभ्यास मंगलवार से शुरू हुआ है। इसे साल 2014 में गरुड़ डिवीजन और सूर्य कमांड के अधीन भारत और अमेरिका के बीच हो चुके संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण 'युद्ध अभ्यास-2014' से कहीं अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मौजूदा आतंकवाद की चुनौती के मद्देनजर दोनों देशों की सेनाएं विभिन्न ऑपरेशन में उच्चकोटि की युद्ध तकनीक भी साझा करेंगी।

सैन्य सूत्रों के अनुसार इस अभ्यास से पर्वतीय क्षेत्रों में उत्पन्न आंतरिक विद्रोह और आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए दोनों देशों की सेनाओं को सक्षम बनाना है यानि पाकिस्तान को सीधा संकेत है कि अब उसके हर आतंकी साज़िश का भारत और अमेरिका मिलकर मुंहतोड़ जवाब देंगे।

भारत-अमेरिका का युद्धाभ्यास... - 14 से 27 सितंबर तक उत्तराखंड में रानीखेत के चौबटिया में युद्धाभ्यास - दोनों देशों के 225 जवान संयुक्त अभ्यास में हिस्सा लेंगे - अगस्त में भारत और अमेरिका के बीच हुआ लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ अग्रीमेंट (LEMOA) करार - रिपेयर और सप्लाई के लिए भारत और अमेरिका की सेनाएं एक-दूसरे के बेस का इस्तेमाल कर सकती हैं - संयुक्त अभ्यास, ट्रेनिंग, मानवीय मदद और आपदा राहत के लिए भी सेनाएं एक दूसरे की मदद करेंगी