भारतीय वायुसेना किसी भी प्रकार के खतरे से निपटने को तैयार: वायुसेना प्रमुख


न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली ( 11 नवंबर ): वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बी एस धनोआ ने रविवार को कहा कि भारतीय वायुसेना हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में उभरते संभावित खतरों के प्रति बहुत सजग है। उन्होंने कहा कि उनका बल भारत के राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भारत के पड़ोस में नए हथियारों-उपकरणों को शामिल किए जाने और आधुनिकीकरण की रफ्तार चिंता का कारण है।

धनोआ ने न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कहा कि भारत अनसुलझे क्षेत्रीय विवादों और प्रायोजित राज्येतर तथा विदेशी तत्वों से उत्पन्न चुनौतियों का सामना कर रहा है, लेकिन वायुसेना इनका प्रभावी तरीके से सामना करने में सक्षम है और इस दिशा में आगे बढ़ रही है। यह पूछे जाने पर कि क्या वायुसेना जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पार आतंकवादी प्रशिक्षिण शिविरों को ध्वस्त करने में भूमिका निभा सकती है, उन्होंने इस तरह की संभावना से इंकार नहीं किया।

एयर चीफ मार्शल ने कहा, 'वायुसेना सीमापार से पैदा खतरों का सामना करने के लिए पूरी तरह से सक्षम है, चाहे ये (खतरे) उप-पारंपरिक क्षेत्र के हों या अन्य क्षेत्रों के हों।' चीन और पाकिस्तान का नाम लिए बिना भारत की वर्तमान सुरक्षा चुनौतियों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि वर्तमान चुनौतियां अनसुलझे क्षेत्रीय मुद्दों, प्रायोजित राज्येतर एवं विदेशी तत्वों से पैदा होती हैं जो राष्ट्रीय हितों के खिलाफ काम करती हैं।

वायुसेना प्रमुख नेकहा, वायुसेना हिंद-प्रशांत क्षेत्र में पैदा होने वाले संभावित खतरों पर लगातार नजरें बनाए हुए है। वायुसेना हमारी सीमाओं पर संभावित खतरों की चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह से सक्षम है। आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में आधारभूत ढांचा विकास एक महत्वपूर्ण विषय है, हम वहां के घटनाक्रम पर पैनी नजर रखते हैं।

धनोआ ने कहा 'वर्तमान चुनौतियां अनसुलझे क्षेत्रीय मुद्दों की भी हैं। प्रायोजित गैर-राज्य कलाकार और अंतर्राष्ट्रीय अभिनेता जो वैश्विक हितों के माध्यम से राष्ट्रीय हितों के खिलाफ कार्य करते हैं। वायुसेना 24X7 किसी भी प्रकार की धमकी से निपटने के लिए तैयार है और अपनी पूरी सामग्री से दुश्मन को भी जवाब दे सकता है।'

वर्तमान में, आईएएफ में 42 स्क्वाड्रन की अधिकृत ताकत के नीचे लड़ाकू विमानों के कुल 32 स्क्वाड्रन हैं। वायुसेना इस समय फाइटर स्क्वाड्रोन की कमी से जूझ रहा है, चीफ ने कहा कि लड़ाकू स्क्वाड्रन को बढ़ाने की उनकी प्राथमिकता है।


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