डिजिटल इंडिया बनना इतना आसान नहीं, चाहिए 80 लाख Wi-Fi हॉटस्पॉट

नई दिल्ली(14 जनवरी): भले ही पीएम नरेंद्र मोदी ने भारत को डिजिटल बनाने का नारा दिया हो लेकिन यह सफर इतना भी आसान नहीं होने जा रहा है। एक नई स्टडी ने यह बताया है कि ग्लोबल लेवल तक पहुंचने के लिए भारत को अभी भी लगभग 80 लाख Wi-Fi हॉटस्पॉट की जरूरत है जबकि अभी यहां मात्र कुछ 31,000 हॉटस्पॉट ही उपलब्ध हैं।

- ASSOCHAM-Deloitte द्वारा संयुक्त रूप से की गई इस स्टडी 'डिजिटल इंडिया: अनलॉकिंग द ट्रिलियन डॉलर ऑपरट्यूनिटी' में बताया गया है कि ग्लोबल लेवल पर हर 150 लोगों पर एक Wi-Fi हॉटस्पॉट है और अगर भारत को इस लेवल तक पहुंचना है तो उसे 80 लाख और हॉटस्पॉट लगाए जाने की जरूरत है।

- डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के सामने इसमें सबसे बड़ी चुनौती धीमा आधारभूत विकास है। भारत के मेट्रो शहरों में उपलब्ध स्पेक्ट्रम विकसित देशों की तुलना में 10 गुना कम है। इसी कारण यहां हाई-स्पीड डेटा सर्विस उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।

- डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह जरूरी है कि पूरे देशभर में नागरिकों के बीच मौजूद डिजिटल अंतर को दूर किया जाए और दूरदराज के ग्रामीण इलाकों तक भी कनेक्टिविटी पहुंचाई जाए। वर्तमान में भारत के लगभग 55,000 गावों में मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं है। इस स्टडी में यह भी कहा गया है कि इन इलाकों में निजी सर्विस प्रवाइडरों द्वारा मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं कराना भी एक कारण है। इसके अलावा, इस स्टडी में सरकार की FDI पॉलिसी में स्पष्टता की कमी होने को भी एक कारण माना गया है। स्टडी के मुताबिक, इसके कारण बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां और ट्रांसपोर्ट सर्विस देने वाली कंपनियां अपनी सेवाएं उपलब्ध नहीं करा पा रही हैं।

- बता दें कि हाल में 2014 की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि भारत में लगभग 70 पर्सेंट लोग जानकारी के अभाव के कारण इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते हैं। इसके कारण डिजिटल इंडिया प्रोग्राम काफी प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा डिजिटल सर्विस का स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध नहीं होना भी एक बड़ी चिंता का विषय है। स्टडी में कहा गया है कि क्लाउड आधारित सर्विस जैसे डिजिलॉकर आदि में डेटा सिक्यॉरिटी भी एक चुनौती है। हाल में, अगस्त 2016 में बड़े स्तर पर डेटा चोरी की खबर आई थी जिसमें लगभग 32 लाख लोगों के डेबिट कार्ड डेटा को चुरा लिया गया था।