आजादी के 70 साल पर लाल किले के प्राचीर से क्या बोले पीएम मोदी, जानिए बड़ी बातें

नई दिल्ली(15 अगस्त): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 71वें स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले की प्राचीर से लगातार चौथी बार देश को संबोधित किया। जानिए प्रधानमंत्री के भाषण की बड़ी बातें...

-आस्था के नाम पर हिंसा का रास्ता इस देश में चल नहीं सकता। इसे देश कभी स्वीकार नहीं कर सकता है। भारत छोड़ो का नारा आजादी से पहले का था। आज भारत जोड़ो का नारा हैः पीएम मोदी

-सुदर्शन चक्रधारी मोहन से लेकर चरखाधारी मोहन तक हम से ऐतिहासिक विरासत के धनी हैं। देश की आन-बान-शान और गौरव के लिए जिन-जिन लोगों ने त्याग किया है, यातनाएं झेली हैं उन सबको नमन है।

-कभी-कभी प्राकृतिक आपदा संकट भी मोल लेत हैं। पिछले दिनों देश के कई भूभागों पर प्राकृतिक आपदा का संकट आया। हमारे अस्पताल में मासूम बच्चों की मौत हुई। सभी संकट के समय देशवासियों की संवेदना लोगों के साथ है। देश की सुरक्षा के लिए कुछ भी करने में हम कमी नहीं रहने देंगे: पीएम मोदी

-यह वर्ष आजाद भारत के लिए विशेष साल है। यह वर्ष है, जब हम चंपारण सत्याग्रह के सौ साल मना रहे हैं। भारत छोड़ो आंदोलन की 75 वीं वर्षगांठ है। बाल गंगाधर तिलक ने सार्वजनिक गणेशोत्सव की जो शुरुआत की थी, उसकी भी 125 वीं सालगिरह है।

-1942 से 1947 के बीच देश ने सामूहिक शक्ति का प्रदर्शन किया, अगले 5 वर्ष इसी सामूहिक शक्ति, प्रतिबद्धता, परिश्रम के साथ देश को आगे बढ़ाएं।

-इंडिया जो सुरक्षित, समृद्ध और शाक्तिशाली हो और सबको समान अवसर उपलब्ध कराता हो। कोई छोटा नहीं, कोई बड़ा नहीं...सवा सौ करोड़ लोगों की सामूहिक शक्ति और नए संकल्प के साथ हम एक न्यू इंडिया के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ें।

-2018 का एक जनवरी साधारण दिन नहीं होने वाला है। जो लोगों ने 21वीं शताब्दी जन्म लिया है, वे 18 18 साल के होने शुरू हो जाएंगे। वे भारत के भाग्यविधाता हैं, मैं उनका अभिनंदन करता हूं। चलता है वाली प्रवृत्ति हमें छोड़नी पड़ेगी और बदल सकते हैं वाला मनोभाव अपनाना पड़ेगा, देश के तौर पर हमें यही आगे बढ़ने में मदद करेगी।

-आज देश में ईमानदारी का उत्सव मनाया जा रहा है। जिन्होंने देश को लूटा और गरीबों को लूटा वे चैन की नींद नहीं सो पा रहे हैं। बेईमानों को सिर छुपाने की जगह नहीं मिल रही है। जब हमने सर्जिकल स्ट्राइक की तो दुनिया ने हमारा लोहा माना।

- सेना के लिए सालों से लटके वन रैंक वन पेंशन को हमने लागू किया। GST जिस तरह से सफल हुआ उसके पीछे कोटि-कोटि लोगों का हाथ है। जीएसटी सहयोगात्मक संघवाद की भावना की मिसाल है। पूरा देश इसके लिए साथ आया और तकनीक से भी इसमें मदद मिली।