Independence Day SPL: आज भी भारत में लागू हैं अंग्रेजों के बनाए हुए ये कानून

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (15 अगस्त): देश आज 73वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस मौके पर लाल किले से लेकर लाल चौक तक जश्न का माहौल है। लेकिन बहुत ही कम लोगों को यह मालूम होगा कि आजादी के इतने साल बीत जाने के बाद भी हमारे देश में अंग्रेजों के बनाए हुए कानून चल रहे हैं। आज हम आपको उन कानूनों के बारे में बता रहे हैं जो अंग्रेजों के जमाने से लेकर अभी तक भारत में लागू हैं।

1. खाकी वर्दी

खाकी वर्दी आधिकारिक तौर पर हैरी बर्नेट ने साल 1847 में लागू की थी। इसमें खाक शब्द का अर्थ धूल, पृथ्वी और राख होता है। इसका मतलब ये होता है कि इसे पहनने वाला अपनी सेवा के दौरान खुद को खाक में मिलाने के लिए तैयार है। इसी के चलते आज भी भारतीय पुलिस की आधिकारिक वर्दी का रंग खाकी है।

2. बाएं हाथ की यातायात व्यवस्था

बाएं हाथ में चलने का नियम अंग्रेजों ने 1800 के दशक में शुरू की थी। इस व्यवस्था के तहत हम आज भी सड़क के बाएं हाथ पर ही चलते हैं, जबकि पूरी दुनिया के 90% देशों में दाएं हाथ पर चलते हैं। बाएं हाथ पर चलने का नियम भारत के अलावा गिने-चुने देशों में ही हैं।

3. साल्ट उपकर अधिनियम-1953 (Salt Cess Act-1953)

गांधी जी ने नमक सत्याग्रह आंदोलन के द्वारा नमक कर का विरोध किया गया था, लेकिन आपको ये नहीं पता होगा कि भारत में आज भी नमक पर कर लगाया जाता है। इस कर को साल्ट उपकर अधिनियम, 1953 के तहत लगाया जाता है।

4. भारतीय पुलिस अधिनियम-1861

भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 को अंग्रेजों ने 1857 की पहली क्रांति के बाद बनाया था। इस कानून को पास करने के पीछे का उद्देश्य पुलिस बल की स्थापना करना था जोकि सरकार के खिलाफ किसी भी विद्रोह को निर्ममता से कुचल सके। इस एक्ट के तहत सारी शक्तियां राज्य के हाथ में ही थीं जोकि एक तानाशाह सरकार की तरह काम करता था। आज भारत एक संप्रभु गणराज्य है, लेकिन भारत के ज्यादातर राज्यों में ये कानून आज भी लागू है।

5. भारत साक्ष्य अधिनियम 1872

ये अधिनियम मूल रूप से 1872 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित किया गया था। ये अदालत की कोर्ट मार्शन सहित सभी न्यायिक कार्यवाहियों पर लागू होता है। हालांकि ये शपथ-पत्र और मध्यस्थता पर लागू नहीं होता है। इस अधिनियम के तहत आपको पता चलता है कि कोर्ट में कौन-कौन सी चीजें साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल की जा सकती हैं और इन सभी सबूतों और गवाहों की लिस्ट को कोर्ट के सामने पहले से ही बताना पड़ता है।

6. आयकर अधिनियम 1961

इस आयकर अधिनियम के आधार पर ही भारत में आयकर लगाया जाता है जो कि कर लगान, वसूल करने और कर ढांचे के बारे में दिशा-निर्देशों को जारी करता है। हालांकि सरकार ने प्रत्यक्ष कर संहिता लाकर इस कर के साथ-साथ संपत्ति कर अधिनियम 1957 को भी हटाने का मन बना लिया था, लेकिन संपत्ति कर के हटने के बाद विचार बदल दिया।

7. विदेशी अधिनियम 1946

इस एक्ट को भारत के स्वतंत्र होने के पहले अधिनियमित किया गया था। यह अधिनियम किसी भी ऐसे व्यक्ति को विदेशी बताता है जो भारत का नागरिक नहीं है। कोई व्यक्ति विदेशी है या नहीं इस बात को सिद्ध करने की जिम्मेदारी भी उसी व्यक्ति पर होती है। ऐसे में अगर किसी भारतीय व्यक्ति के बारे में कोई शक है कि ये विदेशी है और बिना दस्तावेजों के भारत में रह रहा है तो वो किसी भी नजदीकी पुलिस स्टेशन पर इसकी जानकारी दे सकता है।

8. संपत्ति स्थानांतरण अधिनियम 1882

संपत्ति स्थानांतरण अधिनियम 1882 एक भारतीय कानून है जो कि भारत में संपत्ति के हस्तांतरण को नियंत्रित करता है। 1 जुलाई 1882 को यह अस्तित्व में आया। यह अधिनियम संपत्ति स्थानांतरण के संबंध में विशिष्ट प्रावधानों और शर्तों के बारे में बताता है। संपत्ति के हस्तांतरण का मतलब ये है कि एक व्यक्ति अपनी संपत्ति को एक या एक से अधिक लोगों को स्वयं दे सकता है।

9. भारतीय दंड संहिता 1860

भारतीय दंड संहिता का मसौदा भारत के प्रथम विधि आयोग की सिफारिशों पर 1860 में तैयार किया गया था। भारत में प्रथम विधि आयोग की स्थापना 1833 के चार्टर एक्ट के अंतर्गत थॉमस मैकाले की अध्यक्षता में की गई थी। भारतीय दंड संहिता ब्रिटिश काल में साल 1862 में लागू की गई थी।