सरकार ने बनाया नया नियम, जुर्माना देकर भी अब नहीं छुटेंगे टैक्स चोर, जाना होगा जेल

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (18 जून): टैक्स हेराफेरी और चोरी करने वालों के लिए खबर अच्छी नहीं है। सरकार ने टैक्स में चोरी या फिर हेराफेरी करने वालों पर नकेल कसने के लिए कानून में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने करदाताओं को लिए कंपाउंडिंग यानी बड़ा जुर्माना देकर सजा से बचने की सुविधा खत्म कर दी है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी CBDT ने 'कंपाउंडिंग ऑफ ऑफेंसेज डायरेक्ट टैक्स लॉज' पर 30 से ज्यादा पन्नों का संशोधित दिशानिर्देश शुक्रवार को जारी किया। यह संशोधित दिशानिर्देश अब दिसंबर 2014 में जारी दिशानिर्देश की जगह ले चुका है।  

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के रिवाइज्ड गाइडलाइंस के मुताबिक, ब्लैकमनी और बेनामी कानून के तहत किए गए अपराध गंभीर माने जाएंगे जो अभी तक गंभीर नहीं माने जाते थे। इसका मतलब है कि अगर कोई शख्स या कंपनी टैक्स चोरी करता है तो सिर्फ टैक्स पेमेंट, पेनाल्टी और ब्याज चुकाने से मामला हल नहीं होगा। इनकम टैक्स की नई गाइडलाइंस 17 जून 2019 यानी कल से लागू हो गयाहै। अब से टैक्स चोरी के सभी मामलों को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा। रिवाइज्ड गाइडलाइंस में 13 तरह के मामलों की लिस्टिंग की गई है। CBDT ने अपने सीनियर अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इसके आधार पर ही टैक्स चोरी से जुड़े मामलों का निपटारा होगा। ये 13 मामले अभी तक गंभीर अपराध की श्रेणी में नहीं आते थे।

इनकम टैक्स की धारा 115-0 या चैप्टर XVII-B के तहत अगर आप टैक्स नहीं चुकाते हैं तो यह अपराध A कैटेगरी में आता है। सोर्स से टैक्स कलेक्टर करके अगर कोई कंपनी या शख्स टैक्स नहीं चुकाता है तो वह भी इसी कैटेगरी का अपराध माना जाएगा। कैटेगरी B में वो कंपनी या शख्स आएंगे जो टैक्स चोरी के लिए विलफुल डिफॉल्ट करते हैं। इनमें वो भी शामिल होंगे जो जरूरी दस्तावेज या अपने खातों का ब्योरा नहीं देंगे। साथ ही वैरिफिकेशन के लिए फर्जी डॉक्यूमेंट्स मुहैया कराने का अपराध भी इसी कैटेगरी में आएगा।

नए गाइडलाइंस के मुताबिक, इनकम टैक्स की धारा 275 A, 275B और 276 के तहत किया गए अपराध को बेहद गंभीर की श्रेणी में नहीं डाला गया है. नए गाइडलाइंस ने 2014 के गाइडलाइंस की जगह ली है.रिवाइज्ड गाइडलाइंस के मुताबिक, ब्लैकमनी (अघोषित फॉरेन इनकम और एसेट्स) एंड इंपोजिशन ऑफ टैक्स एक्ट, 2015 के मुताबिक किए गए अपराध को सामान्य नहीं माना जाएगा. बेनामी ट्रांजैक्शन (प्रोहिबिटेशन) एक्ट, 1988 के तहत किए गए अपराध को भी टैक्स अधिकारी अब गंभीर अपराध मानेंगे।