अब आम आदमी को नहीं देगा होगा टैक्स, सरकार बना रही है यह योजना!

मनीष कुमार, नई दिल्ली (26 दिसंबर): फरवरी के पहले हफ्ते में वित्त मंत्री अरुण जेटली का बजट पिटारा खुलेगा, जिसपर सबकी नजर रहेगी। खासतौर में नौकरीशुदा लोग जो ईमानदारी से सरकार को अपना टैक्स चुकाते आए है। नोटबंदी और संसद से पास हुए इनकम टैक्स संशोधन कानून के चलते माना जा रहा है कि टैक्स कलेक्शन में

भारी बढ़ोत्तरी के जरिए सरकार को जबरदस्त कमाई होने वाली है। ऐसे में माना जा रहा कि आने वाले बजट में इनकम टैक्स छूट में बढ़ोत्तरी कर वित्त मंत्री टैक्सपेयरों को राहत दे सकते हैं। जिसके संकेत खुद वित्त मंत्री दे रहे हैं।

नोटबंदी के बाद बैंकों के पास नगदी बढ़ने वाली है पर नगदी के सकंट से कई उद्योगों पर सकंट के बादल मंडरा रहे है। नगदी घटने से मांग में कमी आई है। ऐसे में इस संकट से उबारने के लिए सरकार से इनकम टैक्स छूट बढ़ाने के साथ राहत देने की मांग की जा कही है। जिससे लोगों की सेविंग बढ़ेगी और मांग को बढाने में मदद मिलेगी।

माना जा रहा है कि टैक्स में छूट की सीमा को मौजूदा समय में 2.50 लाख से बढ़ाकर 3.50 से 4 लाख रुपये किया जा सकता है। तो 3.50 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक 10 फीसदी, 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक 20 फीसदी, 10 लाख रुपये से रुपये तक के इनकम पर 30 फीसदी टैक्स स्लैब किया जा सकता है।

अभी 2.50 लाख रुपये तक के इनकम पर कोई टैक्स नहीं देना पडता। 2.50 लाख से 5 लाख तक के इनकम पर 10 फीसदी टैक्स तो 5 से 10 लाख रुपये तक के इनकम पर 20 फीसदी और 10 लाख रुपये से ज्यादा तक के इनकम पर 30 फीसदी टैक्स देना होता है।

सरकार ने इनकम टैक्स छूट सीमा को बढ़ाया तो 2.50 से 3.50 लाख रुपये तक के इनकम पर पहले 10000 रु टैक्स देना पड़ता था उन्हें एक रुपया भी टैक्स नहीं चुकाना होगा। 2.50 लाख से 5 लाख के इनकम पर पहले 25000 टैक्स देना पड़ता था उन्हें केवल 15000 रु टैक्स चुकाना होगा। 

बहरहाल ये सब वित्त मंत्री पर निर्भर करेगा हांलाकि खुद जेटली बीते दिनों में कई मौंकों पर इनकम टैक्स में राहत दिए जाने के संकेत दिए है। जानकार भी मानते हैं कि सरकार राहत का फैसला ले सकती है। आरबीआई ने नोटबंदी के बाद आर्थिक विकास दर का अनुमान घटा दिया है तो कई रेटिंग एंजेसियां भी यही बातें दोहरा रही है। ऐसे में वित्त मंत्री के सामने चुनौती है अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की। इसके लिए निवेश और मांग बढाने को तवज्जों देना होगा। इसके लिए जरुरी होगा टैक्यपेयरों पर टैक्स का बोझ को कम कर सरकार राहत दे।