अब 20 हजार से ज्‍यादा के ट्रांजैक्‍शन की IT को देनी होगी डिटेल


नई दिल्ली (6 जुलाई): लगता है मोदी सरकार काले धन के कुबेरों को किसी भी हालत में छोड़ना नहीं चाहती। इसी लिए तो अब ऑडिटर्स को अपने क्‍लाइंट की इम्मूवेबल प्रॉपर्टी (अचल संपत्ति) से जुड़े 20 हजार रुपए से ज्यादा के हर ट्रांजैक्‍शन का खुलासा करना होगा।


ऑडिटर्स को अपने क्‍लाइंट की ओर से इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट के पास एक रिपोर्ट फाइल करनी होती है। डिपार्टमेंट ने एक नोटिफिकेशन के जरिये इससे जुड़े रूल में बदलाव किया है।


इनके लिए जरूरी है अकाउंट का ऑडिट...

- इनकम टैक्‍स एक्‍ट के तहत 50 लाख रुपए से ज्यादा ग्रॉस अर्निंग वाले प्रोफेशनल और 1 करोड़ रुपए से अधिक टर्नओवर वाली कंपनियों को अपना अकाउंट ऑडिट कराना होता है।

- असेसमेट ईयर 2018-19 से कंपनियों के लिए टर्नओवर लिमिट बढ़ाकर 2 करोड़ रुपए कर दी गई है।

- अब तक ऑडिटर्स को अपनी टैक्‍स ऑडिट रिपोर्ट में 20 हजार रुपए से अधिक की प्रॉपर्टी से जुड़ी डिटेल का भी जिक्र करना होगा।

- माना जा रहा है कि इस कदम से फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन में ट्रांसपेरेंसी को बढ़ावा मिलेगा और टैक्स चोरी रोकने में मदद मिलेगी।

- ऑडिट रिपोर्ट में यह भी बताना होगा कि पेमेंट अकाउंट पेई या बियरर चेक के जरिये किया गया या इलेक्‍ट्रॉनिक सिस्‍टम के जरिए।

- नोटिफिकेशन के जरिए टैक्‍स डिपार्टमेंट ने इनकम टैक्‍स एक्‍ट के सेक्‍शन 44एबी के तहत टैक्‍स ऑडिट रिपोर्ट के लिए फॉर्म 3 सीडी को रिवाइज किया है।

- रिवाइज्ड रूल 19 जुलाई 2017 से प्रभावी होगा और यह असेसमेंट ईयर 2017-18 से लागू होगा।