प्रणब मुखर्जी संघ को उसका इतिहास याद दिलाते तो ‘अच्छा’ होता: सीताराम येचुरी

नई दिल्ली (08 जून): नागपुर के आरएसएस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शरीक होने पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देश की संस्कृति और उसकी पहचान की विशेषता का उल्लेख करते हुए कई बातें कही। उन्होंने कहा कि मैं यहां पर राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर बोलने आया हूं। उन्होंने कहा कि देश के लिए समर्पण ही देशभक्ति है। मुखर्जी ने कहा कि भारत खुला हुआ देश रहा है। भारत के दरवाजे पहले से खुले हुए हैं।  

वहीं माकपा ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी यदि संघ को उसका इतिहास याद दिलाते तो ‘अच्छा’ होता जबकि भाकपा ने बहुलतावादी और समग्र समाज को असल भारत के रूप में उल्लेखित करने के लिए उनके भाषण की सराहना की. नागपुर में आरएसएस के एक कार्यक्रम में मुखर्जी के भाषण पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या का अपने भाषण के दौरान जिक्र नहीं करने के लिए उनसे (मुखर्जी) से सवाल किया।

माकपा नेता ने ट्वीट किया कि मुखर्जी को आरएसएस को उसका इतिहास याद दिलाना चाहिए था। वहीं दूसरी ओर भाकपा ने मिलीजुली प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका भाषण अपेक्षा के अनुरूप ही था। उन्‍होंने ट्वीट में लिखा, 'आरएसएस के मुख्‍यालय पर प्रणब मुखर्जी के इतिहास के कैप्‍सूल में महात्‍मा गांधी और उनकी हत्‍या के जिक्र की गैरमौजूदगी कई सवाल छोड़ती है।

उन्‍होंने आगे लिखा, 'वह(प्रणब) आरएसएस को उनका इतिहास याद दिला सकते थे जिसमें कांग्रेस सरकारों द्वारा लगाए गए तीन प्रतिबंध, जिसमें पहली बार महात्‍मा गांधी की हत्‍या के बाद सरदार पटेल द्वारा बैन करना भी शामिल है. पटेल ने गोलवलकर को लिखा था, 'गांधीजी की हत्‍या के बाद आरएसएस के लोगों ने खुशी जताई और मिठाइयां बांटी'।