30 मन गेहूं के बदले गैंगरेप पीड़ित के परिवार से समझौते का दबाव

नई दिल्ली (2 अप्रैल): पाकिस्तान में एक गैंगरेप के मामले में नाबालिग लड़की के परिवार पर एक पुरानी पर गैरकानूनी परंपरा से समझौते के लिए दबाव बनाया जा रहा है। देश की न्याय व्यवस्था का मखौल उड़ाते हुए 30 मन गेंहूं के बदले मामले को कथित तौर पर निपटाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। जिसकी आलोचना की जा रही है।  

अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' की रिपोर्ट के मुताबिक,14 वर्षीय पीड़ित के भाई की तरफ से इस मामले में एक पुलिस केस दर्ज कराया गया था। यह मामला सिंध प्रांत के उमरकोट जिले में गुलाम नबी शाह इलाके का है। 

'जिरगा' के जरिए हुआ समझौता

पीड़ित के पिता ने बताया कि मामला दर्ज होने और इसके बाद मुख्य संदिग्ध की गिरफ्तारी के बाद उसपर 'जिरगा' के जरिए विवाद को निपटाने के लिए दबाव बनाया गया। यह आदिवासी बुजुर्गों में विवादों को निपटाने की एक परंपरागत व्यवस्था थी। उसे 30 मन गेहूं हर्जाने में दिए जाने का वादा किया गया।

जिरगा स्थानीय प्रभावशाली जमींदार की देखरेख में पूरा किया जाता था। 

रिपोर्ट के मुताबिक, शख्स ने बताया कि जब उसने हर्जाना स्वीकार करने से मना किया। तो उससे इलाके को छोड़कर चले जाने के लिए मजबूर किया गया। उसने आरोप लगाया कि जबसे स्थानीय मीडिया ने इस मुद्दे को उठाया, स्थानीय संभ्रान्त लोग उसे धमकी दे रहे हैं और चुप्पी बनाए हुए हैं। इसके अलावा केस वापस लेने के लिए भी कह रहे हैं।

मीरपुर खास डिवीजन के डेप्यूटी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस जावेज आलम ओढो ने इस घटना पर ध्यान दिया है। साथ ही उमरकोट के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को मामले की जांच के आदेश दिए हैं और पीडि़ता के परिवार को सुरक्षा प्रदान करने के लिए कहा है।

पाकिस्तान में गैर-कानूनी है यह व्यवस्था

स्टेशन हाउस ऑफिसर, गुलाम नबी शाह, आरिफ भट्टी ने बताया कि 21 मार्च को पाकिस्तान पीनल कोड की धारा 376 (2) और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा मुख्य संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। 

गौरतलब है, पाकिस्तानी अदालतों ने जिरगा व्यवस्था को गैरकानूनी घोषित किया है। साथ ही उनके फैसले लागू करना जरूरी नहीं है, फिर भी ये दूर के इलाकों में चल रही है।