यूनिफॉर्म सिविल कोड: सरकार के पहले कदम पर एक नज़र...

प्रभाकर मिश्र, नई दिल्ली (1 जुलाई): मोदी सरकार देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की संभावना पर विचार कर रही है। सरकार ने लॉ कमीशन से कहा है कि वो यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी सबके लिए एक कानून बनाने की संभावनाएं तलाशे। ये एक ऐसा मुद्दा है- जिसे कोई भी राजनीतिक दल छेड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। लेकिन, बीजेपी सरकार इस ओर आगे बढ़ रही है। ऐसे में बड़ा सियासी तूफान खड़ा हो सकता है। राम मंदिर की तरह बीजेपी के लिए बड़ा मुद्दा यूनीफॉर्म सिविल कोड भी है।

महजब के आधार पर देश में अलग-अलग कानून खत्म करने की केंद्र सरकार तैयारी कर चुकी है। मतलब,सरकार हर नागरिक को एक जैसे कानून के दायरे में लाना चाहती है। इसके लिए कानून मंत्रालय ने लॉ कमीशन से यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने के मसले पर रिपोर्ट मांगी है। 

फिलहाल, देश में हिंदू-मुसलमानों के लिए अलग पर्सनल लॉ है। जिसमें संपत्ति, शादी, तलाक, उत्तराधिकार जैसे मामले आते हैं। न्यूज़ 24 के पास कानून-मंत्रालय की वो चिट्ठी भी है, जिसमें लॉ कमीशन से यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू कराने से जुड़े हर पक्ष की जांच करने को कहा गया है। कानून मंत्रालय ने इस सिलसिले में हुए फैसलों से जुड़े कागजात की भी मांग की है।

यूनिफॉर्म सिविल कोड बीजेपी का बुनियादी मुद्दा रहा है। केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा खुश है कि कम से कम सरकार ने समान नागरिक संहिता की ओर कदम तो बढ़ाना शुरू किया। हिंदुस्तान की राजनीति में यूनिफॉर्म सिविल कोड एक ऐसा मुद्दा है, जिसे कोई भी राजनीतिक दल छेड़ना नहीं चाहता। मुस्लिम धर्मगुरुओं के सुर अभी से बदल गए हैं। 

समान नागरिक संहिता का जिक्र संविधान की धारा 44 में है। अगर यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू हो जाए तो सभी धर्मों के लिए एक जैसा कानून होगा। इसके बाद हर धर्म के लोगों के लिए शादी, तलाक, गोद लेना और जायदाद के बंटवारे जैसे मामलों में एक ही कानून लागू होगा। फिलहाल हर धर्म के लोग इन मामलों का निपटारा अपने पर्सनल लॉ के हिसाब से करते हैं। 

कांग्रेस समेत देश के कई राजनीतिक दलों की राय यूनिफॉर्म सिविल कोड पर अलग है। इस मुद्दे पर राजनीतिक तीर अभी से चलने शुरू हो गए हैं। कुछ का तर्क है कि समान नागरिक संहिता लागू होने से लोगों की धार्मिक आजादी खत्म हो जाएगी। हिंदुस्तान की राजनीति में 1985 में शाह बानो केस के यूनिफॉर्म सिविल कोड बड़ा मुद्दा बन गया। तब सुप्रीम कोर्ट ने शाह बानो केस में कहा था कि पर्सनल लॉ में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होना चाहिए। लेकिन, संसद में कानून बनाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को हल्का कर दिया गया । अब, बीजेपी सरकार ने देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की राह में पहला कदम बढ़ा दिया है।