नोटबंदी की घोषणा के 50 दिन- देश के पांच महत्वपूर्ण सेक्टर्स पर क्या पड़ा असर... जानिए

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (29 दिसंबर): नोटबंदी का असर आम आदमी के जीवन पर तो पड़ा ही है लेकिन इसका बड़ा असर अर्थव्यवस्था और कारोबार पर भी पड़ा है। देश के पांच बड़े सेक्टर्स कृषि, मैन्यूफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल्स, रिएल एस्टेट और टूरिज्म पर इसका असर साफ-साफ देखा जा रहा है। कितना उत्पादन बड़ा, क्या गाड़ियां और मकान सस्ते होंगे। नोटबंदी के बाद हर कोई यह जानना चाहता है। भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार की क्या तस्वीर बन रही है आइए हम आपको बताते है-  

1- कृषि सेक्टर 

किसानों पर नोटबंदी का हो रहा है असर

  • - किसानों पर नोटबंदी का भारी असर पड़ा है। किसान, मजदूर और ग्रामीण इलाकों की जनता के सामने कई तरह की समस्याएं खड़ी हो गई हैं। फसलें तैयार हैं लेकिन कहीं किसान मंडी खाली पड़ी हैं तो कहीं किसान फसल औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर है। आलू, प्याज, टमाटर और सब्जियों की फसल की फसल सड़कों पर फैंकी और रोंदी जा रही है।
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  • अरसे बाद अछे मानसून के चलते कृषि की विकास दर में इजाफा हुआ है। इसके चलते दूसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर तीन फीसद के ऊपर चली गई है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्र से मिल रही खबरों के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि बीज नहीं मिलने की वजह से रबी की बुवाई में 8-9 नौ फीसद की कमी आई है। 
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  • किसानों को नकदी की कमी के चलते खाद खरीदने में भी दिक्कतें आ रही हैं। इन सबका असर रबी के उत्पादन पर पड़ेगा। ऐसा होता है, तो कृषि क्षेत्र की विकास दर आने वाली तिमाहियों में प्रभावित होगी। इसका असर जीडीपी पर भी पड़ेगा। कृषि सेक्टर का जीडीपी में 17 फिसदी का योगदान है।

ASSOCHAM की रिपोर्ट के मुताबिक- टीआर से खत्म होगी किसानों की परेशानी उद्योग। नोटबंदी की वजह से खेती, मुर्गी पालन तथा बागवानी से जुड़े लोगों को नकदी की किल्लत से हो रही समस्या के निदान के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) नैफेड तथा अन्य केंद्रीय एवं राज्य प्रतिष्ठानों को फसल के बदले हस्तांतरणीय रसीद (टीआर) जारी करने की सलाह दी है।  एसोचैम ने आज जारी वक्तव्य में कहा कि सरकार को एफसीआई तथा नैफेड जैसे अन्य केंद्रीय एजेंसियों को निर्देश देना चाहिए कि वे फसल खरीदकर किसानों को टीआर जारी करें और यह टीआर कृषि उत्पाद संबंधी सभी स्टोरों पर मान्य होने चाहिए।

2- मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर 

 उत्पादन और नए ऑर्डर पर दिख रहा असर

  • नोटबंदी के चलते नवंबर माह में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि रफ्तार धीमी पड़ी है। नकदी की कमी के चलते घरेलू खपत कमजोर पडऩे से वस्तुओं के उत्पादन, नए ऑर्डर पर असर पड़ा है कई औद्योगिक क्षेत्रों में तो मांग घटने के चलते उत्पादन में पहले ही 30 फीसद तक कम कर दी गई है। चूंकि बाजार में नकदी की कमी के चलते बिक्री काफी घटी है, इसलिए इंवेंट्री बनने से बचने के लिए विभिन्न सेक्टरों ने उत्पादन घटा दिया है। इसका असर मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर पर होगा, जो सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में 16 फिसदी हिस्सेदारी रखता है।
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  • अगले कुछ क्वॉर्टर्स में इस सेक्टर पर और असर दिख सकता है। जुलाई-सितंबर के लिए देश की जीडीपी ग्रोथ बढ़कर 7.3 पर्सेंट रही है, जो इससे पिछले क्वॉर्टर में 7.1 पर्सेंट की थी। लेकिन मैन्युफैक्चरिंग वैल्यू ग्रोथ गिरकर 7.1 पर्सेंट पर आ गई, जो मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के पहले क्वॉर्टर में 9.1 पर्सेंट की थी। डोमेस्टिक और विदेशी क्लाइंट्स से अधिक डिमांड के बावजूद कैश की कमी ने ग्रोथ को धीमा किया है। नवंबर में नए एक्सपोर्ट ऑर्डर्स की रफ्तार भी कुछ घटी है।    
  • NIKKEI की रिपोर्ट के मुताबिक-  विनिर्माण क्षेत्र पर नवंबर में नोटबंदी का असर देखा गया तथा निक्केई द्वारा जारी पर्चेजिंग मैनेजर्स सूचकांक (पीएमआई) अक्टूबर के 54.4 से गिरकर नवंबर में 52.3 पर रह गया। पीएमआई आँकड़े यह दिखाते हैं कि ऊँचे मूल्य वाले नोटों को अचानक अमान्य करार दिये जाने से विनिर्माण क्षेत्र के लिए मुश्किल पैदा हो गयी है क्योंकि नकदी की कमी से नये ऑर्डर, खरीददारी और उत्पादन प्रभावित हुआ है। हालाँकि, कुछ लोगों ने क्षेत्र के पूरी तरह लुढक़ जाने का पूर्वानुमान लगाया होगा, लेकिन वह वृद्धि बनाये रखने में कामयाब रहा।

3- ऑटोमोबाइल्स सेक्टर 

 ऑटोमोबाइल्स मार्केट पर मिलाजुला असर- टूव्हीलर मार्केट पर मार लेकिन लक्जरी कारों की बिक्री बढ़ी

  • - ऑटो सेक्टर पर नोटबंदी का असर मिला जुला पड़ा है। जहां एक और नोटबंदी का सबसे ज्यादा मार टूव्हीलर मार्केट पर पड़ी है, क्योंकि इन्हीं में सबसे ज्यादा ट्रांजैक्शन कैश में होता है। नवंबर में हीरो मोटो कॉर्प की सेल्स में लगभग 20 फीसदी की गिरावट दर्ज की की गई है। जानकारों के मुताबिक फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही में ऑटो सेक्टर में सेल्स में 3 फीसदी की कमी आने का अनुमान जाहिर किया है। नवंबर 2016 में टूव्हीलर की कुल बिक्री 5.85 फीसदी घटकर 12,43,251 वाहन रही जो नवंबर 2015 में 13,20,552 वाहन थी। 
  • - वहीं दूसरी और नवंबर में घरेलू बाजार में कार बिक्री बड़ी है। इस साल नवंबर में घरेलू बाजार में कार बिक्री 1,73,606 वाहन रही है जो पिछले साल इसी अवधि में 1,73,111 वाहन थी। लग्जरी कारों के सेगमेंट में नोटबंदी के बाद हैरान करने वाला आकंड़ा सामने आया है। हर साल देश में 35 हजार लग्जरी गाड़ियां (बीएमडब्ल्यू, जगुआर, ऑडी, मर्सेडीज और पॉर्श) बिकती हैं। इस साल में इसमें कोई कमी नहीं आई है। खबरों के मुताबिक लग्जरी गाड़ियों की सेल बड़ी हैं। 

SIAM की रिपोर्ट के मुताबिक- सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स (SIAM) के जारी नए आंकड़ों के अनुसार, इस साल नवंबर में सभी सेगमेंट को मिलाकर वाहनों की बिक्री 5.48 फीसदी गिरकर 15,63,665 वाहन रही जो नवंबर 2015 में 16,54,407 वाहन थी। जबकि, 2-3 व्हीलर्स और कॉमर्शियल वाहनों की बिक्री में इस दौरान 26 फीसदी तक की गिरावट आई है। 2-व्हीलर्स  की बिक्री 6% और 3-व्हीलर्स की बिक्री 26% गिरी। कॉमर्शियल व्हीकल की बिक्री भी 10 फीसदी से ज्यादा गिरी, लेकिन कारों की बिक्री में मामूली बढ़ोत्तरी रही।

4- रिएल एस्टेट सेक्टर

रिएल एस्टेट सेक्टर में हो रहा है मिला जुला असर

  • - रिएल एस्टेट में नोटबंदी का असर अलग-अलग देखने को मिल रहा है। प्रोपर्टी कारोबार से जुड़े जानकारों के मुताबिक नोटबंदी का असर ज्यादातर रीसेल प्रॉपर्टी और लैंड डिलिंग में देखने को मिल रहा है। लेकिन प्रामयरी सेगमेंट यानि मिड सेगमेंट या लोवर में इस तरह की कोई समस्या नजर नहीं आती।  हालांकि ब्याज दरें काफी घटने की उम्मीद है। 
  • - 8 नवंबर घोषित हुई नोटबंदी का सबसे ज्यादा असर रियल एस्टेट सेक्टर पर पड़ना लाजिमी था। आम धारणा बन गई है कि काले धन को खपाने के लिए रियल एस्टेट का इस्तेमाल किया जाता है। इसी वजह से घरों के दाम बढ़ते रहे हैं। इसलिए यह माना गया कि नोटबंदी के बाद घरों के दाम में गिरावट आएगी। इसका असर पूरे देश में दिखा और नोटबंदी के तुरंत बाद रियल एस्टेट ट्रांजैक्शंस रुक गए। बाद में जाकर सेल्स शुरू हुई है, लेकिन बहुत कम।

NAREDCO की रिपोर्ट के मुताबिक- नोटबंदी के बाद पूरे देश में प्रॉपर्टी की कीमतें कम हो गईं हैं। कई जगहों पर प्रॉपर्टी बाजार 30 फीसद तक गिर गया है। इसके वजह से सभी डेवलेपर परेशान हैं। नोटबंदी ने रियल एस्टेट की कमर ही तोड़ दी है। प्रॉपर्टी को खरीदने वाले लोग बहुत कम हो गए हैं। नोएडा दिल्ली, फरीदाबाद, गुड़गांव और गाजियाबाद में भी भारी गिरावट देखने को मिली है रजिस्ट्रियों में औसतन 60 फीसदी तक की गिरावट आई  है। रियल एस्टेट सेक्टर में करीब 12 हजार करोड़ के छोटे-बड़े प्रोजेक्ट निर्माणाधीन हैं लेकिन नोटबंदी से ज्यादातर प्रभावित हो रहे हैं। देश की जीडीपी में रियल एस्टेट सेक्टर का हिस्सा 11 प्रतिशत है। 

5- टूरिज्म सेक्टर

विदेशी पर्यटकों की संख्या में हुआ इजाफा

  • - नोटबंदी का फैसला लागू होने के बाद जहां एक ओर विपक्ष सरकार के फैसले का विरोध कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पर्यटन के क्षेत्र से चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। नोटबंदी के बाद नवंबर महीने में भारत घूमने आए विदेशी पर्यटकों की संख्या में पिछले साल के मुकाबले इजाफा हुआ है। नवंबर में करीब 8.91 लाख विदेशी पर्यटक भारत आए जो पिछले साल इसी महीने के आंकड़े से 9.3 फीसदी ज्यादा है। आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल नवंबर में 8.16 लाख विदेशी पर्यटक भारत आए थे।
  • - इस साल नवंबर में भारत आने वाले विदेशियों से फॉरेन एक्सचेंज अर्निंग (FEE) 14,474 करोड़ रुपये हुई, जो कि पिछले साल 12,649 करोड़ रुपये थी। नवंबर में सबसे ज्यादा अमेरिकी पर्यटक भारत आए। जनवरी 2016 से नवंबर 2016 तक के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो कुल 1,38,845 करोड़ विदेशी पर्यटक भारत आए। जबकि पिछले साल ये आंकड़ा 1,21,041 करोड़ था। यानी इस साल विदेशी यात्रियों के आने में 14.7 फीसदी की बढ़त देखी गई।

ASSOCHAM के सर्वे के मुताबिक- नोटबंदी से टूरिज्म 65 फीसदी तक प्रभावित- एसोचैम के मुताबिक नोटबंदी का असर होटल और टूरिज्म सेक्टर पर पड़ा है। गोवा को छोड़कर देशभर का करीब 65 फीसदी पर्यटन कारोबार प्रभावित हुआ है। टूरिज्म क्षेत्र में अक्टूबर और नवम्बर माह में सबसे ज्यादा पर्यटक भारत आते हैं। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात के अहमदाबाद, उत्तराखंड, गोवा, केरल में सबसे ज्यादा सैलानी आते हैं। अंतरराष्ट्रीय बुकिंग में 40-45 फीसदी तक गिरावट आई है। स्थानीय ट्रैवेल्स की मानें तो वे 65 फीसदी कम बुकिंग मिला है।

जॉब मार्केट- क्या नई नौकरियां निकलेंगी

  • - नोटबंदी का नौकरियों पर क्या असर होगा, इसको लेकर जनता अभी पशोपेश में है। 2017 में आईटी, फार्मा, ऑटो, ई-कॉमर्स और टेलीकॉम जैसे सेक्टरों में क्या नई नौकरियां निकलेंगी। अंग्रेजी अखबार इकनॉमिक टाइम्स की खबर के अनुसान फार्मा सेक्टर में बड़ी तादाद में नौकरियां निकल सकती हैं जबकि आईटी में थोड़ी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी, ई-कॉमर्स में छोटी और मध्यम आकार की कंपनियां नौकरियां देंगी।
  • - नोटबंदी से मैन्यूफैक्चरिंग और ऑटो सेक्टर को बुरी तरह प्रभावित हुआ है, यहां नौकरियों की गति धीमी रह सकती है। टेलीकॉम सेक्टर में डिजिटल टेक्नोलॉजी और मोबाइल एप्प डेवलपमेंट के क्षेत्र और मजबूत होंगे,  यहां तेजी के साथ भर्तियां निकल सकती हैं। बैंक और ब्रोकिंग फर्म्स बड़े स्तर पर डिजिटल बैंकिंग और फाइनेंशियल रिसर्च टीम विकसित करने की ओर बढ़ रही है, इससे इस क्षेत्र में नियुक्तियां होंगी।

ASSOCHAM के सर्वे के मुताबिक- नोटबंदी के बाद असंगठित क्षेत्र में बेरोजगार हुए लोग। इस क्षेत्र में 3 करोड़ मजदूर हैं। एफएमसीजी, आभूषण तथा लघु-मझौले उपक्रमों (एसएमई) जैसे अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्र प्रभावित हुए हैं वहीं असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले बड़ी संख्या में लोगों की नौकरी चली गई है। कांग्रेस का दावा- नोटबंदी के कारण पिछले 39 दिनों में 70 लाख लोग बेरोजगार हो गए और चार लाख करोड़ का नुकसान होने से देश की अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुंची है। RSS खुश नहीं है- द फर्स्ट पोस्ट की खबर के मुताबिक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ईकाई भारतीय मजदूर संघ के अध्यक्ष बैज नाथ ने कहा कि मोदी शासनकाल में करीब  20 लाख लोग बेरोजगार हो गए हैं।