पाकिस्तान से डरा चीन, अपने नागरिकों को किया अलर्ट

नई दिल्ली ( 8 दिसंबर ): मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के भारत के प्रयासों में बार-बार अड़ंगा लगाने वाला चीन ने अब खुद ही पाकिस्तानी आतंकियों से डरने लगा है। चीन ने शुक्रवार को पाकिस्तान में रह रहे अपने नागरिकों और निवेशकों के लिए आतंकी खतरे की चेतावनी जारी की है। चीन ने पाकिस्तान में मौजूद चीनी नागरिकों को शुक्रवार को आगाह किया कि वहां उन पर ‘आतंकी हमले’ हो सकते हैं। यह असामान्य इसलिए है, क्योंकि चीन पाकिस्तान में बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट्स में भारी निवेश कर रहा है। चीन यहां 57 अरब डॉलर के बेल्ट ऐंड रोड प्रॉजेक्ट तैयार कर रहा है और इसके लिए चीन के हजारों वर्कर्स पाकिस्तान में हैं। चीन ने पाकिस्तान में भारी भरकम निवेश किया है। 

यह चेतावनी ऐसे समय जारी की गई है, जिससे कुछ ही दिन पहले चीन ने चीन-पाक आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) से जुड़ी तीन सड़क परियोजनाओं के लिए फंडिंग अस्थायी रूप से रोकने का एलान किया। परियोजनाओं में भ्रष्टाचार की खबरें आने के बाद बीजिंग ने यह कदम उठाया।

पाकिस्तान स्थित चीनी दूतावास ने अपनी वेबसाइट पर एक बयान में कहा, 'यह समझा जा रहा है कि पाकिस्तान में रह रहे चाइनीज व्यक्तियों और संगठनों पर आतंकवादी सिलसिलेवार हमले कर सकते हैं।' दूतावास ने अपने नागरिकों और संगठनों को सुरक्षा सतर्कता बढ़ाने, आंतरिक एहतियात को मजबूत करने बाहर कम जाने और भीड़भाड़ वाले स्थानों से दूर रहने को कहा है। 

चीनी नागरिकों को पाकिस्तान पुलिस और सेना के साथ सहयोग करने के अलावा कहा गया है कि आपात स्थिति में दूतावास को अलर्ट करें। हालांकि हमलों की आशंका को लेकर और डिटेल नहीं दी गई है। इस मुद्दे पर अभी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया नहीं मिली है। 

चीन को लंबे समय से यह चिंता सता रही है कि शिन्चियांग प्रांत के असंतुष्ट मुस्लिम समुदाय की पाकिस्तान और अफगानिस्तान के आतंकवादियों से दोस्ती हो गई है। इस बीच पाकिस्तान के दक्षिणपश्चिम प्रांत बलूचिस्तान में हिंसा ने पश्चिम चीन से पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के बीच ट्रांसपोर्ट और एनर्जी लिंक्स की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। 

अलकायदा, इस्लामिक स्टेट और तालिबान सभी बलूचिस्तान में सक्रिय हैं, जिसका बॉर्डर ईरान और अफगानिस्तान से मिला हुआ है और यह बेल्ट ऐंड रोड पहल का केंद्र है। इतना ही नहीं, गैस और मिनरल स्रोतों में अधिक हिस्से के लिए अलगाववादी लंबे समय से सरकार से लड़ रहे हैं और एनर्जी व दूसरे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट्स पर हमला करते रहे हैं।