चीन के कर्जे से पाकिस्तान का विकास नहीं विनाश की आशंका- आईएमएफ

नई दिल्ली (18 नवंबर): चीन के बढ़ते इंवेस्टमेंट पाकिस्तान को लेकर डूब सकता है। फौरी तौर पर पाकिस्तान को अर्थव्यवसथा को चीन के निवेश से फायदा दिखायी देगा लेकिन आगे चल कर यही उसके लिए सिर दर्द बनेगा।  इंटरनेशनल मॉनेट्री फंड (आईएमएफ) ने पाकिस्तान को चेताया हैकि रिपेमेंट ऑब्लिगेशन के काफी गंभीर परिणाम हो सकते हैं। आईएमएफ ने चाइना-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर का यहां की इकोनॉ‍मी पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर इवैल्युएशन किया है। आईएमएफ के मुताबिक  शुरुआती फेज में एफडीआई बढ़ेगी और एक्सटर्नल फंड बढ़ेगा।  इसी वजह से पाकिस्तान का करेंट अकाउंट घाटा भी बढ़ने की आशंका है। 

आईएमएफ की रिपोर्ट में कहा गया है कि चाइना-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) से जुड़ा इंपोर्ट 2020 तक 11 फीसदी तक पहुंच जाएगा। यह 5.7 अरब डॉलर के बराबर होगा, लेकिन देश में इन्‍फ्लो उस साल की अनुमानित जीडीपी का 2.2 फीसदी होगा। चीन की वज़ह से पाकिस्तान की जरूरतें  60 फीसदी बढ़ जाएंगी। पाकिस्तान में इस प्रोजेक्ट  के लिए शुरुआती तौर पर 27.8 अरब डॉलर रुपए आएंगे। जबकि बाकी  रकम 2030 तक निवेश की जायेगी। 

आईएमएफ ने कहा कि जब चीन अपने निवेश का फायदा लेंगे तो पैसा तेजी से पाकिस्तान से बाहर यानी चीन की तिजोरी मेंं जाने लगेगा। पाकिस्तान तेजी से बाहर जाने वाले पैसे को चाह कर भी नहीं रोक पायेगा।  तब आउटफ्लो बढ़ेगा और उसके साथ रिपेमेंट ऑब्लिगेशंस भी बढ़ेंगे। यह ऑब्लिगेशन चीनी बैंकों से लिए गए लोन पर बढ़ेगा। आईएमएफ ने अनुमान लगाया है कि 2021 के बाद पाकिस्तान पर चीन का कर्जा  बढ़ने की आशंका है और लॉंग टर्म में यह हर साल जीडीपी का 0.4 फीसदी हो जाएगा। लोंगटर्म पेमेंट भी पाकिस्तान के लिए एक समस्या होगा। क्योंकि पाकिस्तान में एक्सट्रा ग्रोथ के कोई लक्षण दिखाई नहीं दे रहे हैं।