दस साल की मुस्लिम 'दिव्यांग' रिदा रैहान को याद है पूरी गीता

नई दिल्ली (16 फरवरी): दिल्ली में बिरयानी बेचकर परिवार का पेट पालन वाले रईस हैदर बड़े फक्र से कहते हैं जन्म से दृष्टि दिव्यांग रिदा ज़ेहरा मेरी बेटी है। रिदा को भगवद् गीता कण्टस्थ है। हाथ जोड़ कर जब वो कर्म योग की ऋचाएं बोलती है तो सुनने वाले भाव विह्वल हो जाते हैं। हैदर कहते हैं कि रिदा भगवद गीता का पाठ करे या क़ुरान पढ़े इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। वो उस परवदनिगार को याद करती है जिसने इंसान को बनाया और उसे नेकी के रास्ते पर चलने का आदेश दिया है। रिदा, उन लोगों से बेहतर है जो फिरकापरस्ती में पड़ कर भूल जाते हैं कि हम सब इंसान एक ईश्वर की संतान हैं।

रिदा जन्म से ही 80 फीसदी दृष्टि दिव्यांग है। जब वो तीन साल की ही थी, हैदर ने उसे मेरठ के बृजमोहन दिव्यांग स्कूल में भर्ती करा दिया था। तब से रिदा वहीं रहती और पढ़ती है। छुट्टियों में वो अक्सर अपने घर भी जाती रहती है। रिदा के टीचर प्रदीप बताते हैं कि उन्होंने रिदा में किसी भी बात को सुन कर हू-ब-हू याद कर लेने की विलक्ष्ण क्षमता है। पिछले वर्ष बच्चों के गीता कम्पटीशन में भेजने के लिए अपने स्कूल से उन्होंन गीता को चुना। रिदा ने गीता सीखने में उम्मीद से ज्यादा अच्छा प्रदर्शन किया।