खुश होने पर यहां देवी करतीं है अग्नि स्नान, जानिए इसके पीछे का रहस्य

नई दिल्ली (14 अगस्त): क्या आपने कभी किसी देवी को अग्नि स्नान करते देखा है। नहीं न, तो हम बताते हैं एक ऐसी जगह के बारे में जहां देवी खुद करती हैं अग्नि स्नान। 

हम बात कर रहे हैं राजस्थान के उदयपुर में स्थित ईडाणा माता मंदिर के बारे में। मंदिर के पास रहने वाले पंडित सज्जनदास की मानें तो मान्यता के अनुसार ईडाणा माता पर अधिक भार होने पर माता स्वयं ज्वालादेवी का रूप धारण कर लेती हैं। इस दौरान स्थानक पर अचानक आग धधकने लगती है।

देखते ही देखते अगिन विकराल रूप धारण कर 10 से 20 फिट तक लपटें पहुंच जाती है मगर श्रृंगार के अतिरिक्त अन्य सामग्री को कोर्इ आंच तक नहीं आती है। भक्त इसे देवी का अग्नि स्नान कहते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि लकवा से ग्रसित रोगी मां के दरबार में आकर स्वस्थ हो जाते हैं।

महाभारत काल में हुआ था इसका निर्माण ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण महाभारत काल में हुआ था। कई चमत्कारों को अपने अंदर समेटे हुए इस मंदिर में नवरात्र के दौरान भक्तों की भीड़ बहुत बढ़ जाती है। ईडाणा माता का अग्नि स्नान देखने के लिए हर साल भारी संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं। अग्नि स्नान की एक झलक पाने के लिए भक्त घंटों इंतजार करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इसी समय देवी का आशीर्वाद भक्तों को प्राप्त होता है। पुराने समय में ईडाणा माता को स्थानीय राजा अपनी कुलदेवी के रुप में पूजते थे।

मंदिर में नहीं है कोई पुजारी ईडाणा माता का मंदिर अपने अग्नि स्नान के लिए देश भर में मशहूर है। लेकिन इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां कोई पुजारी नहीं है। गांव के लोग खुद मां की पूजा करते हैं। उनकी सेवा करते हैं और देवी भक्ति का लाभ उठाते हैं। एक किवदंती के अनुसार यह स्थान 4500 हजार साल पुराना है। एक स्थानीय पुजारी के अनुसार यहां महाराणा भी पूजा के आया करते थे। भक्तों को किसी प्रकार की कठिनाई न हो इसके लिए ईडाणा मंदिर ट्रस्ट द्वारा अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। वही यहां पर भक्तों के लिए सभी सुविधाएं मुहैया कराते हैं।

अग्नि स्नान के कारण अब तक नहीं बन पाया मंदिर यहां देवी की प्रतिमा माह में दो से तीन बार जागृत अग्नि से स्नान करती है। जिससे मां को चढ़ाई गई सभी चुनरियां, धागे आदि भस्म हो जाते हैं। अग्नि स्नान के कारण ही यहां माता का मंदिर नहीं बन पाया। यह सभी को पता है की माताजी अग्नि स्नान करती हैं, लेकिन आग कैसे और क्यों लगती है इसकी जानकारी किसी को नहीं। प्रतिमा स्थापना का कोई इतिहास यहां के पुजारियों को ज्ञात नहीं है। बस इतना बताया जाता है कि वर्षों पूर्व यहां कोई तपस्वी बाबा तपस्या किया करते थे। बाद में धीरे-धीरे स्थानीय पड़ोसी गांव के लोग यहां आने लगे।

ठीक हो जाते हैं लकवा के मरीज, मंदिर में चढ़ते हैं त्रिशूल और झूले ऐसा माना जाता है मां भक्तों की कामनाएं पूरी करती हैं लेकिन कहते हैं कि मां की सबसे ज्यादा कृपा बीमार भक्तों पर बरसती है। ईडाणा माता का दरबार खुले में एक चौक में स्थित है। मां के भक्तों में विश्वास है कि लकवा से ग्रसित रोगी यहां आकर ठीक हो जाते हैं। यहां भक्त मन्नत पूरी होने पर त्रिशूल चढ़ाने आते हैं। लिहाजा मां की प्रतिमा के पीछे सैकड़ों त्रिशूल लगे हैं। संतान प्राप्ति की मन्नत पूरी होने पर यहां झूले चढ़ाए जाते हैं। सभी लकवा ग्रस्त रोगी मां की प्रतिमा के सामने स्थित चौक में सोकर रात बिताते हैं। लकवा ग्रस्त रोगियों के स्वस्थ होने पर परिजनों द्वारा यहां चांदी और लकड़ी के अंग बनवाकर भेंट किए जाते हैं।

24 घंटे खुला रहता है माता का दरबार कभी बिलकुल बीहड़ में स्थित इस शक्ति-पीठ में इन दिनों काफी विकास कार्य हुए हैं। श्री इडाना मां मंदिर का ट्रस्ट पिछले कुछ वर्षों में भामाशाहों के सहयोग एवं मंदिर के चढ़ावे से यहां धर्मशाला निर्माण, गौशाला निर्माण, रोगियों को मुफ्त भोजन एवं आवास सहित और कई जनोपयोगी कार्य करवाए गए हैं। यहां पर भक्त कभी भी आ सकते हैं और प्रतिमा का दर्शन कर सकते हैं। लेकिन प्रमुख दर्शन प्रातः साढ़े पांच बजे आरती के समय, सात बजे श्रृंगार दर्शन के समय और शाम को सात बजे की आरती के दौरान होते हैं।

देखिए वीडियो

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