पनामा के बाद पैराडाइज पेपर्स लीक से बड़ा खुलासा, 714 भारतीयों के नाम शामिल

नई दिल्ली ( 6 नवंबर ): मोदी सरकार नोटबंदी के एक साल पूरा होने पर एंटी ब्लैक मनी डे मनाने की तैयारी में है। लेकिन इससे ठीक पहले ब्लैक मनी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। यह खुलासा जर्मनी के जीटॉयचे साइटुंग नामक उसी अखबार ने किया है जिसने 18 महीने पहले पनामा पेपर्स का खुलासा किया था। 96 मीडिया ऑर्गेनाइजेशन के साथ मिलकर इंटरनैशनल कॉन्सोर्टियम ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) ने 'पैराडाइज पेपर्स' नामक दस्तावेजों की छानबीन की है। 'पैराडाइज पेपर्स' में 1.34 करोड़ दस्तावेज शामिल हैं, जिनमें दुनिया के कई अमीर और शक्तिशाली लोगों के गुप्त निवेश की जानकारी दी गई है। 

इन नामचीन हस्तियों में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कई मंत्रियों, कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रू़डो के मुख्य फंडरेजर सहित कई भारतीयों के नाम शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन लोगों ने विदेशी फर्मों और फर्जी कंपनियों की मदद से अपने धन को ठिकाने लगाए। पैराडाइज पेपर्स में उन विदेशी फर्मों और फर्जी कंपनियों के बारे में बताया गया है, जो इन हस्तियों के पैसे विदेशों में भेजने में उनकी मदद करते हैं।

पैराडाइज पेपर्स में 714 भारतीयों के भी नाम

इस कंसोर्टियम में शामिल अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, पैराडाइज पेपर्स में 180 देशों के लोगों की जानकारियां मिली हैं। इसमें 714 भारतीयों के भी नाम हैं। अखबार के मुताबिक, यह बस शुरुआती खुलासा है और अभी ऐसे 40 से ज्यादा बड़े खुलासे और किए किए जाएंगे। 

पैराडाइज पेपर्स ने 18 महीने पहले आए पनामा पेपर्स की याद एक बार फिर ताजा कर दी है, जिसने दुनिया भर में खूब हलचल मचाई थी। पनामा पेपर्स में नाम आने के कारण पाकिस्तान में नवाज शरीफ सहित कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों को अपने पद से हाथ धोना पड़ा था।