रामसेतु मानव निर्मित है या कुदरती, पता लगाएगा आईसीएचआर

नई दिल्ली(25 मार्च): रामसेतु प्राकृतिक है या इसे किसी इंसान ने बनाया है इस गुत्थी को सुलझाने के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च (आईसीएचआर) शोध करेगा।


- शोध के जरिये यह पता लगाया जाएगा कि रामसेतु से जुड़ी बातें मिथ हैं या फिर हकीकत। शोध के काम में देशभर से 20 रिसर्च स्कॉलर को शामिल किया जाएगा। शोध में भारतीय पुरातत्व विभाग के पूर्व निदेशक भी सहयोग करेंगे।


- आईसीएचआर के चेयरमैन वाई सुदर्शन राव ने बताया कि रामसेतु पर पायलट प्रॉजेक्ट अक्टूबर में शुरू किया जाएगा और यह दो महीने तक चलेगा। इसके बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे उसका पेपर पब्लिश किया जाएगा।


- उन्होंने कहा, 'अभी तक किसी ने रामसेतु को लेकर मटीरियल एविडंस एकत्र नहीं किए हैं। इस पायलट प्रॉजेक्ट में मरीन आर्कियॉलजिस्ट की मदद से मटीरियल 

एविडंस सामने लाने की कोशिश की जाएगी।'


- उन्होंने बताया, 'यह पूरा प्रॉजेक्ट असम की सिल्चर यूनिवर्सिटी में आर्कियॉलजी के प्रफेसर आलोक त्रिपाठी की देखरेख में होगा। प्रफेसर त्रिपाठी ASI के डायरेक्टर रह चुके हैं। इस पायलट प्रॉजेक्ट के लिए रिसर्च स्कॉलर का चयन राष्ट्रीय स्तर पर सिलेक्शन प्रकिया के जरिए होगा, जिन्हें जून में दो हफ्ते की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।'


- यूनेस्को से डायविंग (गोताखोरी) लाइसेंस लेकर इस प्रॉजेक्ट पर काम किया जाएगा। इसमें ASI और एक्सपर्ट्स मरीन आर्कियॉलजिस्ट की मदद ली जाएगी। ICHR के मेंबर सेक्रटरी आनंद शंकर सिंह ने बताया, 'ICHR दिल्ली में 27 से 29 मार्च तक तीन दिन का सेमिनार भी करने जा रहा है जिसमें डार्क पीरियड की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की जाएगी। इसमें ईसा पूर्व 10 लाख साल पहले भारत में सिविलाइजेशन और कल्चर के विकास की बात होगी।'