पोखरण में 'आयरन फिस्ट' : दो लक्ष्य भेदने में नाकामी का 'क्रिटिकल मूल्यांकन' करेगी वायुसेना

नई दिल्ली (21 मार्च) : भारतीय वायुसेना राजस्थान के पोखरण में हुए शक्ति प्रदर्शन 'ऑयरन फिस्ट' के दौरान दो लक्ष्य को भेदने में रही नाकामी का 'क्रिटिकल मूल्याकंन' करेगी।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में युद्धाभ्यास से जुड़े पहलुओं के विशेषज्ञ और वायुसेना के शीर्ष अधिकारी के हवाले से ये जानकारी दी गई है। ये अभ्यास 18 मार्च को पोखरण में हुए थे। मिराज '2000' लड़ाकू विमान के ज़रिए अमेरिका निर्मित लेज़र गाइडेड बम को चंदन फायरिंग रेंज में एक पूर्व निर्धारित स्थिर लक्ष्य पर गिराया गया। लेकिन ये लक्ष्य को भेदने में नाकाम रहा। इस लक्ष्य को 'दुश्मन की रडार साइट'  माना गया था और '3N' नाम दिया गया।    

इसी तरह सोवियत निर्मित ओएसए एके-एम सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम भी अपने लक्ष्य को नही भेद सका।

अधिकारी ने बताया कि दो मिसाइलों में से एक अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाई। ऐसा लगता है कि फ्यूज़ ने काम नहीं किया जिसकी वजह से मिसाइल लक्ष्य के नज़दीक पहुंचने में नाकाम रही।

नियंत्रित परिस्थितियों में हथियारों का लक्ष्य को नहीं भेदना चिंता का विषय है लेकिन वायुसेना के सूत्रों का कहना है कि हथियारों में से 10 फीसदी के काम नहीं करने की संभावना, रणनीतिक प्लानिंग प्रक्रिया में शामिल रहता है।

रिपोर्ट में भारतीय वायुसेना की प्रवक्ता विंग कमांडर रोशेल डिसिल्वा के हवाले से कहा गया कि जैसी उम्मीद थी हथियारों ने वैसा ही प्रदर्शन किया।  

शक्ति प्रदर्शन 'ऑयरन फिस्ट' में 103 लड़ाकू विमानों समेत कुल 181 विमानों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा कई वेपन सिस्टम्स का भी इस्तेमाल किया गया। इस शक्ति प्रदर्शन के नतीजों का वायुसेना इनका बारीकी से अध्ययन करेगी।