BREAKING: हुआ बड़ा खुलासा, चीन ने ऐसे गिराया भारत का सुखोई-30!

कुंदन सिंह, नई दिल्ली (29 मई): असम के तेजपुर से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद चीन सीमा के पास से लापता हुए भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान सुखोई-30 का मलबा तो मिल गया, लेकिन अभी तक पता नहीं चला है कि हादसे की वजह क्या थी। हालांकि 100 घंटे गुज़रने के बाद इससे जुड़ी एक खबर आई है। कहा जा रहा है कि सुखोई क्रैश के पीछे चीन की साज़िश हो सकती है।


एक विश्लेषण में कहा गया कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि हाईटेक सुरक्षा से लैस सुखोई के सिस्टम किया हैक किया गया हो, ठीक वैसे ही जैसे पूरी दुनिया में वायरस अटैक से बड़ी-बड़ी कंपनियों के कंप्यूटर हैक किए जाते हैं।


सुखोई-30 लड़ाकू विमान मंगलवार सुबह करीब 9.30 बजे नियमित ट्रेनिंग के उड़ा पर था और करीब 11.30 बजे तेजपुर से 60 किलोमीटर उत्तर में चीन सीमा के पास अरुणाचल प्रदेश के दोउलसांग के पास रडार से इसका संपर्क टूट गया। करीब 72 घंटों की तलाश के बाद विमान का मलबा उस जगह के पास ही मिला है, जहां से विमान का संपर्क टूटा था। न्यूयॉर्क की एक विश्लेषण में इस बात की संभावना जताई गई है कि हाई टैक्नॉलोजी से लैस सुखोई पर भी वैसा ही अटैक हो सकता है जैसे इन दिनों बैंकों, अस्पतालों और बड़ी-बड़ी कंपनियों के कंप्यूटर को हैक कर लिया जाता है।


कहा जा रहा है ऐसी संभावना है कि विमान के कोकपिट में लगे कंप्यूटर को हैक करने के बाद कंट्रोलिंग सिस्टम बैठ गया हो और पायलटों को गड़बड़ी समझ में ना आई हो, जिससे ज़मीन से भी उसका संपर्क टूट गया हो। हालांकि ऐसी संभवाना ना के बराबर है, लेकिन इनकार भी नहीं किया जा सकता। विश्लेषण के मुताबिक ये हैंकिग कुछ मीटर की दूर से और हज़ारों किलोमीटर दूर से भी की जा सकती है। चीन की साज़िश इसलिए कही जा रहा है, क्योंकि जिस वक्त सुखोई से संपर्क टूटा था उस वक्त वो चीन की सीमा के पास उड़ रहा था।


हम आपको बता दें कि सुखोई वायुसेना का अग्रिम पंक्ति का लड़ाकू विमान है। करीब 358 करोड़ रुपये की लागत वाला ये विमान 4.5 जेनरेशन का विमान है और इस समय दुनिया के श्रेष्ठ लड़ाकू विमानों की लिस्ट में शामिल है। ये हर मौसम में उड़ान भर सकता है। हवा से हवा में, हवा से सतह पर मार करने में सक्षम है और सबसे हाई टैक्नॉलोजी से लैस है। ये कोई मिग विमान नहीं है जो आसानी से गिर जाए और उड़ते-उड़ते इसका सिस्टम बैठ जाए। इसीलिए कुछ जानकार हैकिंग की बात आसानी से मानने को तैयार नहीं हैं।


अगर सुखोई की खासियत पर नज़र डालें तो ये इंडियन एयरफोर्स के लिए बेहद अहम है...

- सुखोई-30 में ब्रह्मोस मिसाइल में रखने की क्षमता है।

- जरूरत पडऩे पर सुखोई बमबारी के साथ मिसाइल से अचूक निशाना भी दाग सकता है।

- इस लड़ाकू विमान की खासियत ये है कि सुखोई एक घंटे में 2450 किमी तक पहुंच जाता है।

- एक बार उड़ान भरने के साथ वो आठ हजार किलो तक के हथियार लेकर 5200 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है।

- सुखोई 2,450 किलोमीटर प्रतिघंटे की अधिकतम रफ्तार से उड़ता है।

- सुखोई की असली ताकत अत्याधुनिक रडार है।

- अपने रडार से ये दुश्मन विमान को बहुत दूर से ही पहचानकर निशाना बनाने में माहिर है।

- सुखोई एक बार में 3 हजार किलोमीटर तक सीधी उड़ान भर सकता है। ये पौने चार घंटे तक लगातार हवा में रह सकता है।

- इसमें हवा में ही रिफ्यूलिंग की सुविधा है। ईंधन भरे जाने के बाद ये 10 घंटे तक हवा में रह सकता है।


ऐसा नहीं है कि हाई टैक्नॉलोजी से लैस होने के बाद इसे हादसे का शिकार नहीं होता है। एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले सात साल में 7 सुखोई विमान हादसे का शिकार हो चुके हैं।


पहला हादसा: 30 अप्रैल 2009 को पोकरण के पास हुआ।

दूसरा हादसा: जैसलमेर क्षेत्र में ही 30 नवंबर 2009 को हुआ था।

तीसरा हादसा: पुणे के पास 13 दिसंबर 2011 को हुआ।

चौथा हादसा: 19 फरवरी 2013 को आयरन फीस्ट के अभ्यास के दौरान क्रैश हुआ।

पांचवां हादसा: अक्टूबर2013 में पुणे के पास क्रैश हुआ।

छठा हादसा: 19 मई 2015 को असम में तेजपुर में हुआ।


2 इंजन वाले सुखोई-30 एयरक्राफ्ट का निर्माण रूसी की कंपनी सुखोई एविएशन कॉरपोरेशन ने किया है। भारत की रक्षा जरूरतों के लिहाज से सुखोई विमान काफी अहम है। एक बार फिर सुखोई का मलबा मिला है, जिस पर सस्पेंस बना हुआ है।