इशरत जहां मुठभेड़: पूर्व अधिकारी ने बताया कैसे होता था टॉर्चर

नई दिल्ली(2 मार्च): इशरत जहां मुठभेड़ मामले में नया मोड़ आया है। इस मामले में अब एक और पूर्व वरिष्ठ अधिकारी सामने आए हैं। अधिकारी का कहना है कि इशरत मामले से जुड़े मामले में तत्कालीन यूपीए सरकार में राजनैतिक स्तर पर शपथ पत्र में बदलाव किए गए थे। तत्कालीन केंद्र सरकार ने इस मामले में दो शपथ पत्र दाखिल किए थे। पहले शपथ पत्र में कहा गया था कि इशरत जहां सहित जिन लोगों को कथित फर्जी मुठभेड़ में मार गिराया गया था, आतंकी थे।

दो महीने के अंदर दाखिल दूसरे शपथ पत्र में सरकार ने पूरी तरह से यू-टर्न लेते हुए कहा कि इस बात के पक्के सबूत नहीं हैं कि मुठभेड़ में मारे गए लोग आतंकी नहीं थे। इन दोनों शपथ पत्रों पर हस्ताक्षर करने वाले केंद्रीय गृहमंत्रालय में पूर्व अवर सचिव (आंतरिक सुरक्षा) आर वी मनी ने दावा किया है कि सरकार ने उन्हें रबर स्टैंप की तरह इस्तेमाल किया था।

पूर्व अधिकारी ने आगे बताया कि उन्हें दूसरे शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया गया। उन्होंने इस बात के संकेत दिए की मामले की जांच कर रहा विशेष जांच दल (एसआईटी) चाहता था कि वह गुजरात के इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारियों को इस मामले में घसीटूं।

मनी ने आरोप लगाया कि एसआईटी प्रमुख सतीश वर्मा ने उन्हें यातनाएं दीं। उन्होंने आगे कहा कि वर्मा ने उन्हें सिगरेट से दाग दिया था। यही नहीं, एक सीबीआई अधिकारी ने पीछा किया।