केंद्र नहीं जाऊंगा, मध्यप्रदेश में ही रहूंगा और यहीं मरुंगा: शिवराज सिंह चौहान

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (13 दिसंबर): मध्य प्रदेश में 13 साल तक मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल वह केंद्र की राजनीति नहीं करेंगे। एमपी में बीजेपी के चुनाव हारने के बाद यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि शिवराज अब केंद्र में जा सकते हैं। यह भी कहा जा रहा था कि शिवराज 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। बता दें कि मुख्यमंत्री बनने से पहले शिवराज कई बार लोकसभा के सांसद भी रह चुके हैं। शिवराज ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, 'मैं केंद्र में नहीं जाऊंगा। मैं मध्य प्रदेश में जिऊंगा और मध्य प्रदेश में ही मरूंगा।'  

सिर्फ 5 सीटों से कांग्रेस से पिछड़ी बीजेपीबता दें कि प्रदेश में 28 नवम्बर को हुए विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने 114 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की है, जो कि बहुमत के आंकड़े 116 से मात्र दो सीटें कम है। वहीं प्रदेश में पिछले 15 वर्षों से सत्तारुढ़ दल भाजपा 109 सीटें हासिल कर दूसरे स्थान पर रही। प्रदेश में दो सीटों पर बसपा, एक समाजवादी पार्टी और चार पर निर्दलीयों ने विजय दर्ज की है। प्रदेश में कुल 230 विधानसभा सीटें हैं। 

किसानों का कर्ज माफ करें राहुलमध्य प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों के लिए मंगलवार को हुई मतगणना में भाजपा से हारने के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद चौहान ने  को बताया, ''कांग्रेस ने अपने 'वचन पत्र में 10 दिन में कर्ज माफी का वचन दिया है। उन्होंने कहा कि राहुल जी ने कहा था कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के 10 दिन में यदि किसानों को कर्ज माफ नहीं होगा तो हम (कांग्रेस) मुख्यमंत्री बदल देंगे।   चौहान ने कहा, ''यह उनका (राहुल गांधी) विषय है। वह तय करें। लेकिन मुझे विश्वास है कि वह उस वादे को जरूर पूरा करेंगे। अपने शासनकाल के दौरान चलाई गई संबल एवं लाडली लक्ष्मी योजना सहित विभिन्न योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने प्रदेश में बनने वाली सरकार से आग्रह किया कि वह इन योजनाओं को ठीक ढंग से चलाए।  

हार का जिम्मेदार मैं हूंउन्होंने कहा, ''अथक परिश्रम करने के बाद भी हमें अपेक्षित सफलता भी प्राप्त नहीं हुई। अगर इस हार के लिए कोई जिम्मेदार है तो शिवराज सिंह चौहान है। मैं हूं। चौहान ने कहा, ''केन्द्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के बाद भी हम चुनाव हार गये। दोष मुझमें ही है। कमी मुझमें ही कहीं न कहीं है। मैं इस कसौटी पर खरा नहीं उतर पाया। 'अबकी बार 200 पार पर हम फेल हो गए हैं।

जब उनसे सवाल किया गया कि 13 मंत्रियों के हारने में क्या टिकट वितरण में गलती हुई, तो उन्होंने कहा, ''जो भी गलती थी, वह मेरी थी। हम जनता के बीच अपने विकास की योजनाओं को ठीक से नहीं पहुंचा पाये। इसके अलावा, कांग्रेस ने जनता के बीच भ्रम का वातावरण बनाया। जब उनसे सवाल किया गया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को इस हार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, तो इस पर उन्होंने कहा, ''कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है। यह प्रदेश का मुद्दा है।

2019 में बनेगी बीजेपी की सरकार   उन्होंने कहा कि अब हम सशक्त एवं रचनात्मक सहयोग से विपक्ष की भूमिका निभाएंगे और प्रतिरोध पर चौकीदारी की भी जिम्मेदारी हमारी है। एक सवाल के जवाब में चौहान ने कहा कि वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में फिर से भाजपा की सरकार बने, यह मेरी मंशा है और इसके लिए हम अभी से तैयारी शुरू करेंगे।   उन्होंने कहा कि जनता से असीम स्नेह और प्यार सरकार को विशेष रूप से मुझे मिलता रहा। उन्होंने कहा,''परिवार का सदस्य बनकर मैंने सरकार चलाने की कोशिश की। मुझे लगता था कि प्रदेश की साढ़े सात करोड़ जनता मेरा परिवार है। उनका सुख मेरा सुख और उनका दुख मेरा दुख है। अपने 13 साल के शासनकाल में मैंने भरसक क्षमता के साथ प्रदेश का विकास करने की कोशिश की।