विदाई भाषण में इंदिरा गांधी को याद कर भावुक हुए प्रणब मुखर्जी

नई दिल्ली ( 23 जुलाई ): राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने रविवार को संसद के केंद्रीय हाॅल में अपना भावुक विदाई भाषण दिया। पीएम नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का संसद भवन पहुंचने पर स्वागत किया। उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत दोनों सदनों के सांसद इस मौके पर मौजूद रहे। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सभी सदस्यों का धन्यवाद देते हुए दिल को छू लेने वाली कई बातें कहीं।

पने संसदीय कार्यकाल के दौरान तमाम उतार-चढ़ाव, सीख और पुरानी यादों का जिक्र किया। मुखर्जी ने इंदिरा गांधी और जवाहरलाल नेहरू से लेकर लाल कृष्ण आडवाणी, सोनिया गांधी और पीएम नरेंद्र मोदी जैसे तमाम वरिष्ठ नेताओं का भी जिक्र किया। प्रणव मुखर्जी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को यादकर भावुक हो गए। 

प्रणव मुखर्जी ने कहा, मेरे करियर को इंदिरा गांधी ने दिशा दी। उन्होंने कहा कि वह मेरी मार्गदर्शक थीं। इंदिरा गांधी बहुत निडर थीं। इमरजेंसी के बाद हम पहली बार साथ लंदन गए। मीडिया ने पूछा- इमरजेंसी से आपको क्या मिला? उन्होंने कहा- हमने उन 21 महीने में देश के सभी तबकों को एक साथ किया। इसके बाद सबके सब शांत हो गए और हीथ्रो एयरपोर्ट के लाउंज में शांति छा गई। 

प्रणव मुखर्जी ने कहा 'संसद ने मुझे एक व्यक्ति के रूप में निर्मित किया। लोकतंत्र के इस मंदिर में मेरी रचना हुई। मैं थोड़ा भावुक महसूस कर रहा हूं। मैं 37 साल तक राज्यसभा और लोकसभा का सदस्य रहा। आप सभी को इस शानदार विदाई समारोह के लिए शुक्रिया। संसद के दोनों सदनों के सदस्यों का धन्यवाद। मैं 22 जुलाई 1969 को अपने पहले राज्यसभा सत्र में शामिल हुआ था। संसद में 37 साल का सफर 2012 में 13वें राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित होने के बाद खत्म हुआ था, फिर भी जुड़ाव वैसा ही रहा।

उन्होंने कहा कि मैं 34 साल की उम्र में ही संसद पहुंच गया था। संसद में मेरा कार्यकाल काफी शानदार रहा। मेरे कार्यकाल में मैंने कई नेताओं से सीख ली।  मैंने वरिष्ठों से काफी सीखा। अपने संसदीय कार्यकाल के दौरान मैंने डॉ मनमोहन सिंह, लाल कृष्ण आडवाणी, सोनिया गांधी जैसी नेताओं से काफी कुछ सीखा।' उन्होंने कहा कि संसद बहस, चर्चा, असहमति व्यक्त करने की जगह है और संसद की कार्यवाही बाधित होने से सबसे अधिक नुकसान विपक्ष को होता है

मुखर्जी ने कहा, 'हमारा संविधान देश की गरिमा है। इससे सामाजिक, आर्थिक बदलाव की रूपरेखा बनाई जा सकती है। संविधान एक अरब देशवासियों की आत्मा है। पहले संसद में गंभीर चर्चा होती थी। राज्यसभा उत्कृष्ट वक्ताओं से भरा था। अब व्यवधान और बहिष्कार से सदन का नुकसान होता है। संसद में चर्चा का समय घट रहा है।'

उन्होंने कहा, 'अब मैं संसद का हिस्सा नहीं रहूंगा। यादों का इंद्रधनुष लेकर मैं जा रहा हूं। मैं आपसे विदा लेता हूं। खुशी से।'