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हैदराबाद एनकाउंटर पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जांच के लिए आयोग का किया गठन

गैंगरेप (Gang Rape) कर पीड़िता को जलाकर मारने के आरोपियों के पुलिस एनकाउंटर (Encounter) मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बड़ा कदम उठाते हुए जांच का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने जांच करने के

Supreme Court, सुप्रीम कोर्ट

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(12 दिसंबर):  गैंगरेप (Gang Rape) कर पीड़िता को जलाकर मारने के आरोपियों के पुलिस एनकाउंटर (Encounter) मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बड़ा कदम उठाते  हुए जांच का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने जांच करने के लिए एक आयोग गठित कर दिया है। सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस वीए एस सिरपुरकर की अगुवाई में तीन सदस्य वाले जांच आयोग का गठन किया है। एनकाउंटर की जांच के लिए बने आयोग का दफ्तर हैदराबाद में बनाया जाएगा। इस आयोग के सभी सदस्यों को सुरक्षा भी दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस तीन सदस्यीय जांच आयोग को छह महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। आयोग का पूरा खर्च तेलंगाना सरकार को उठाने का आदेश दिया गया है। आयोग के दो अन्य सदस्यों में एक बॉम्बे हाई कोर्ट की पूर्व जज रेखा बल्दोता जबकि दूसरे पूर्व सीबीआई डायरेक्टर डी आर कार्तिकेयन होंगे। मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि लोगों को इस मुठभेड़ की हकीकत जानने का अधिकार है। उन्होंने तेलंगाना पुलिस का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी से कहा,'हम आपको दोषी नहीं बता रहे हैं। आप जांच का विरोध मत कीजिए, बल्कि इसमें भाग लीजिए।'

चीफ जस्टिस बोले सभी को सच्चाई जानने का हक

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने रोहतगी से कहा, 'अगर आप कहते हैं कि आप उनके (मुठभेड़ में शामिल पुलिसवालों को) खिलाफ क्रिमिनल कोर्ट में मुकदमा करने जा रहे हैं तो हमें कुछ नहीं करना है। लेकिन, अगर आप उन्हें निर्दोष मानते हैं तो लोगों को सचाई जानने का अधिकार है। तथ्य क्या हैं, हम अटकलें नहीं लगा सकते।' चीफ जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने कहा , 'हमारा विचार है कि एनकाउंटर की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। जांच होने दीजिए। आपको इसपर क्या आपत्ति है?'

तेलंगाना पुलिस की दलील

इस पर मुकुल रोहतगी ने इस तरह के पुराने मामलों की जांच का हवाला दिया। उन्होंने कहा, 'अतीत में कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की नियुक्ति जांच की निगरानी के लिए की थी न कि जांच करने के लिए।' रोहतगी ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि चारों आरोपियों ने घटना को अंजाम दिया था। सीसीटीवी फुटेज इसका सबूत हैं। आरोपी के पास डॉक्टर की स्कूटी थी और उसने लाश जलाने के लिए पेट्रोल खरीदा था। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा था कि वह तेलंगाना में वेटनरी डॉक्टर से सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले के चारों आरोपियों के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की घटना की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश को नियुक्त करने पर विचार कर रहा है।

वहीं, संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ स्वतंत्र जांच कराने के लिए शीर्ष अदालत में दो याचिकाएं दायर की गई हैं। पहली याचिका अधिवक्ता जी एस मणि और प्रदीप कुमार यादव ने दायर की है जबकि दूसरी याचिका अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा ने दायर की है। मणि और यादव की जनहित याचिका में दावा किया गया है कथित मुठभेड़ फर्जी है और इस घटना में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दायर की जानी चाहिए।


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