'तलाक के लिए कोर्ट में औरत की अर्ज़ी के लिए शौहर की मर्जी जरूरी'

इस्लामाबाद (19 फरवरी): काउंसिल ऑफ इस्लामिक आइडियॉलॉजी (सीआईआई) ने पति की सहमति के बिना कोर्ट से तलाक की मांग के औरतों के हक़ पर सवाल उठाया है। सीआईआई का कहना है कि केवल मर्द ही शादी खत्म कर सकता है।

पाकिस्तानी अखबार 'एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, सीआईआई ने पति की सहमति के बिना निकाह खत्म करने के लिए 'खुला' (औरत की तरफ से दाखिल तलाक की अर्जी) को कोर्ट्स की तरफ से मंजूरी देने को 'गैर-इस्लामी' बताया है। 

हाल ही में हुई मीटिंग में संस्था ने कहा कि कोर्ट्स गलत तरीके से शादियों को खत्म कर रहे हैं। क्योंकि शरिया के तहत केवल पति को ही 'खुला' का हक़ है। सीआईआई ने सिविल कोर्ट्स से अपील की है कि वे 'खुला' और निकाह को एकतरफा खत्म किए जाने में फर्क करें। सीआईआई चीफ ने कहा कि कई औरतों ने जिन्होंने 'खुला' के नाम से अपनी शादी खत्म कीं, उन्हें अभी भी ये साफ पता नहीं है कि उनकी शादी खत्म हुई भी है या नहीं?

सीआईआई का कहना है कि 'खुला' शौहर का विशेषाधिकार है ना कि कोर्ट्स का। जबकि, शरिया ने इसके लिए अलग से ढ़ांचा और प्रक्रिया परिभाषित की है, देश के वर्तमान मैरिज लॉज़ में इन्हें परिभाषित नहीं किया गया है।