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वैज्ञानिकों की चेतावनी, दुनिया को बचाना है तो 3 साल में बचा लो

नई दिल्ली (30 जून): इस समय पूरी दुनिया ग्लोबल वॉर्मिंग और जलवायु परिवर्तन के जानलेवा खतरों से जूझ रही है। अगर इससे बचाना है, तो इंसानों के पास ऐसा करने के लिए केवल 3 साल बचे हैं।

मीडिया रिपोर्ट में एक लेख के हवाले से कहा गया है कि वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने यह चेतावनी दी है। उनका कहना है कि ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन में सार्थक कमी लाने की शुरुआत करने के लिए दुनिया के पास अब केवल 3 साल का वक्त बचा है। अगर इतने समय में कार्बन गैसों के उत्सर्जन में प्रभावी कमी नहीं लाई गई, तो पैरिस समझौते में तापमान को लेकर जो लक्ष्य तय किया गया था उसे हासिल करना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। साथ ही, स्थितियां शायद हमेशा के लिए इंसानों के हाथ से निकल जाएंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और धरती के तापमान के लिहाज से 2020 का साल बेहद अहम और निर्णायक साबित होने वाला है। इस लेख पर दुनिया के जाने-माने 60 से भी ज्यादा वैज्ञानिकों ने अपने हस्ताक्षर किए हैं।

इस लेख में वैज्ञानिकों द्वारा जमा किए गए सबूतों के आधार पर विश्व के राष्ट्राध्यक्षों व नेताओं से अपील की गई है कि वे सच से मुंह न मोड़ें। लेख में कहा गया है कि सभी इको सिस्टम्स (पारिस्थितिक तंत्र) में विनाश की शुरुआत हो चुकी है। आर्कटिक में गर्मियों के दौरान जमी रहने वाली बर्फ गायब हो गई है और बढ़ते तापमान के कारण मूंगे की चट्टानें (कोरल रीफ्स) भी खत्म हो रही हैं। ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन मौजूदा रफ्तार से होता रहा, तो अगले 4 से लेकर 26 सालों के बीच ही इतना कार्बन उत्सर्जित हो जाएगा कि तापमान में डेढ़ से लेकर 2 डिग्री सेल्सियस का इजाफा होगा।


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