ह्युमन कैपिटल इंडेक्सः भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका से भी पीछे है भारत

नई दिल्ली (29 जून): भारत ने विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भले ही कितनी तरक्की कर ली हो लेकिन अपने देश की प्रतिभाओँ का पालन, पोषण और उपयोग कर पाने में काफी पीछे है। यहां तक कि भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका भारत से कहीं आगे हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ताजा जारी सूची में भारत 105वें नम्बर पर और चीन 71वें नम्बर पर है। फोरम की लिस्ट में फिनलैण्ड पहले स्थान पर है।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने यह सूची चीन के तियानझिन शहर में हुई वार्षिक सम्मेलन में जारी की। इस सम्मेलन की थीम थी-न्यू चैंपियंस। इस सम्मेलन को समर दावोस सम्मेलन भी कहा जाता है। इस 130 देशों की सूची में पाकिस्तान भारत से नीचे 118वें नम्बर पर है। फोरम ने कहा है कि भारत के पास जितनी मानव पूंजी है उसका वो सिर्फ 57 फीसदी ही इस्तेमाल कर पाता है। पिछले साल 124 देशों में भारत 100वें नम्बर पर था। हालांकि भारत ने अपने लोगों को शिक्षित करने के मामले में उपलब्धि हासिल की है।

फिर भी अभी तक युवा साक्षरता दर 90 फीसदी ही है। लेकिन भारत में अभी तक कामकाजी महिलाओं की संख्या मर्दों के मुकाबले काफी कम है और वो इस क्षेत्र में 121वे नम्बर पर है। इसके विपरीत कुछ सकारात्मक रुख भी देखने को मिले हैं। जैसे भारत की शैक्षणिक गुणवत्ता बढी है और भारत ने इस क्षेत्र में 39वां स्थान और शैक्षिक प्रशिक्षण में 46वां स्थान हासिल किया है। कुशल कर्मचारियों की श्रेणी में भारत का नम्बर45वां है। इससे ये संकेत मिलते हैं कि भारत को प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों में बढोतरी के प्रयास करने होंगे।

भारत में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित में डिग्रीधारकों की संख्या करीब 7.8 करोड़ है जबकि चीन में इनकी संख्या करीब 25 लाख है। डब्ल्यूईएफ ने कहा कि वैश्विक स्तर पर लोगों के जीवन काल में शैक्षणि, कौशल विकास और नियुक्ति के जरिए विश्व के सिर्फ 65 प्रतिशत प्रतिभा का सबसे अच्छे तरीके से इस्तेमाल हो पाता है। इस सूचकांक में फिनलैंड, नार्वे और स्विट्जरलैंड शीर्ष तीन स्थान पर हैं जो अपनी मानव पूंजी का 85 प्रतिशत तक उपयोग करते हैं। जहां तक 55 साल से इससे अधिक उम्र की प्रतिभाओं के इस्तेमाल का सवाल है जापान इसमें आगे है।