अफगान महिलाओं के 'वर्जिनिटी टेस्ट' को HRW ने बताया 'यौन उत्पीड़न'

नई दिल्ली (1 मार्च):  ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने नैतिक अपराधों के नाम पर अफगान महिलाओं का 'वर्जिनिटी टेस्ट' किए जाने की निंदा की है। संस्था ने कहा है, कि सरकारी डॉक्टरों की तरफ से किए गए ये परीक्षण 'यौन उत्पीड़न' के समान हैं।

पाकिस्तानी अखबार 'एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में महिलाएं लगातार बढ़ती हिंसा और उत्पीड़न का सामना कर रही हैं। 2001 में अमेरिका की अगुवाई में कब्ज़े के बाद तालिबानी शासन के गिरने के 14 सालों के बाद भी ऐसा हो रहा है।

HRW की नई रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा 

अफगानिस्तान के स्वतंत्र मानवाधिकार आयोग ने हाल ही में एक अध्ययन किया। जिसमें पाया कि 53 महिलाओं और 13 साल उम्र के करीब की लड़कियों पर 'प्री-मैरिटल सेक्स' का आरोप लगा। इनमें से 48 को 'वर्जिनिटी टेस्ट' से गुजरना पड़ा। इस आरोप के लिए 15 साल की जेल की सजा तक हो सकती है। 

अध्ययन के मुताबिक, इनमें से आधी महिलाओं और लड़कियों को एक से ज्यादा बार टेस्ट किया गया। अक्सर कई लोगों के सामने यह टेस्ट किया जाता था।  ये अध्ययन एचआरडब्ल्यू की नई रिपोर्ट में प्रकाशित किया गया है। यह रिपोर्ट सोमवार को सामने आई है।

एचआरडब्ल्यू के रीसर्चर हैदर बार ने बताया, "तथाकथित 'वर्जिनिटी एक्जाम्स' केवल अपमानजनक ही नहीं हैं, बल्कि इनमें यौन उत्पीड़न भी होता है। इनका अक्सर कोर्ट में महिलाओं के खिलाफ 'ज़ीना' (शादी के बाहर शारीरिक संबंध बनाना) अपराध के लिए सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।"

WHO ने कहा यह टेस्ट 'वैज्ञानिक' नहीं

गौरतलब है, वर्जिनिटी टेस्टिंग एक ऐसा 'बदनाम' अभ्यास है, जो कई रूढ़िवादी इस्लामी राष्ट्रों में प्रचलित है। 2014 में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन ने दिशानिर्देश जारी कर कहा था, कि इन टेस्ट्स की "कोई भी वैज्ञानिक वैधता" नहीं है।

हैदर बार ने कहा, "अफगान सरकार को नैतिक अपराधों के लिए पूरी तरह से गिरफ्तारियां बंद करनी चाहिए। साथ ही कानून में भी सुधार करना चाहिए, जो इसकी मंजूरी देता है। वर्जिनिटी एक्ज़ाम्स पर प्रतिबंध लगाना सुधारों की तरफ एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।"