लूटेरे दुकानदारों से बचें, ऐसे पता लगाएं जीएसटी देना है या नहीं

दयाकृष्‍ण चौहान, नई दिल्ली (19 सितंबर): हमारे देश में सबसे बड़ी समस्या लोगों में जागरूकता की कमी का होना है। हम जो भी सुनते हैं, वह किसी दूसरे के सामने इस तरह से पेश कर देते हैं कि यही सही है। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। देश में 1 जुलाई से जीएसटी लागू हुआ था, लेकिन अभी भी देशवासियों को नहीं पता कि उन्हें किसे और कितना जीएसटी देना है।

ऐसे में न्यूज 24 देशवासियों के लिए एक ऐसी खबर लेकर आया है, जिसमें हम आपको आसान शब्दों में बताने की कोशिश करेंगे कि आप किस तरह से दुकानदार की लूट से बच सकते हैं।

ऐसे लोगों को नहीं दे जीएसटी... - अगर आप किसी भी सामान को लेने जाते हैं और दुकानदार आपको पक्का बिल नहीं देता है तो उसे किसी भी हालत में जीएसटी का भुगतान ना करें। - अगर दुकानदार आपको पक्का बिल भी कंप्यूटर से निकालकर दे देता है और उसमें उसका जीएसटी नंबर नहीं लिखा हुआ है तो भी उसे टैक्स ना दें। - इसके अलावा कुछ दुकानदार किसी भी सामान पर लिखी हुई एमआरपी के बावजूद जीएसटी लगाकर लोगों को चूना लगाने की कोशिश करते हैं तो ऐसे लोगों को भुगतान ना करें, क्योंकि एमआरपी पर पहले से ही सभी टैक्स लगे होते हैं।

क्या है जीएसटी नंबर... - 1 जुलाई से मोदी सरकार ने सभी दुकानदारों के टिन नंबर को जीएसटी में बदल लिया। अब आपको मिलने वाले बिल पर टिन की जगह जीएसटी नंबर दिखेगा। - लोगों को पता होना चाहिए कि जीएसटी नंबर क्या है और व‍ह किस तरह से काम करता है। - जीएसटी के रूप में आप जो भी टैक्स देते हैं वह दो भागों में विभाजित होता है। इसका एक हिस्सा केंद्र सरकार और एक हिस्सा राज्य सरकार को जाता है। आपको मिलने वाले बिल पर स्टेट जीएसटी और सेंट्रल जीएसटी लिखा होता है। - इसी के साथ दुकानदार आपको जो बिल देता है, उसपर 15 अंकों का एक जीएसटी नंबर होता है। अगर यह नंबर 15 अंकों से कम या ज्यादा हो तो यह फर्जी होगा।

ऐसे पता लगाएं जीएसटी नंबर सही है या नहीं...

- आज के समय में फर्जीवाड़ा करने वाले लोगों की कमी नहीं है। ऐसे में बिना जीएसटी रजिस्टर कराए भी कुछ दुकानदार लोगों से जमकर टैक्स वसूल रहे हैं और अपनी जेब भरने में लगे हैं। - ऐसे में लोगों को पता होना चाहिए कि आप जिस दुकानदार को जीएसटी दे रहे हैं, वह वाकई में रजिस्टर है भी या नहीं। - इसके लिए आपको दुकानदार द्वारा दिए गए बिल पर 15 अंकों का जीएसटी नंबर देखना होगा। - जीएसटी नंबर के 15 अंकों के शुरुआती 2 नंबर आपके राज्य का कोड होता है। - केंद्र सरकार ने हर प्रदेश के लिए अलग-अलग कोड़ दिए हैं। 01-जम्मू और कश्मीर, 02-हिमाचल प्रदेश, 03-पंजाब, 04-चंडीगढ़, 05-उत्तराखंड, 06-हरियाणा, 07-दिल्ली, 08-राजस्थान, 09-यूपी, 10 -बिहार, 11-सिक्किम, 12-अरुणाचल प्रदेश, 13-नागालैंड, 14-मणिपुर, 15-मिजोरम, 16-त्रिपुरा, 17-मेघालय, 18-असम, 1 9-पश्चिम बंगाल, 20-झारखंड, 21-ओडिसा, 22-छत्तीसगढ़, 23-मध्य प्रदेश, 24-गुजरात, 25-दमन और दीव, 26-दादर और नगर हवेली, 27-महाराष्ट्र, 28-आंध्र प्रदेश, 29 -कर्नाटक, 30-गोवा, 31-लक्षद्वीप, 32-केरल, 33-तमिलनाडु, 34-पुदुचेरी और 35- अंडमान और निकोबार द्वीप समूह। - इसके बाद के दो अंक दुकानदार या कंप‍नी का रजिस्टर पैन नंबर होते हैं। - इसके बाद आखिरी तीन नंबर में पहला 1-9 की संख्या जबकि दूसरा A-Z में से कोई और अंतिम में संख्या होती है। - ऐसे में अगर आप किसी भी दुकानदार से बिल लेते हैं और आपको शक है कि उसपर पड़ा जीएसटी नंबर गलत है तो आप https://services.gst.gov.in/services/searchtp पर उस नंबर को डालकर पता लगा सकते हैं कि वह उसके नाम से रजिस्टर भी है या नहीं। - अगर आपको पता चलता है कि दुकानदार ने गलत या फर्जी जीएसटी नंबर अपने बिल पर डाला हुआ है तो आप उसकी शिकायत Email : [email protected] और 0120-4888999, 011-23370115 पर फोन करके भी कर सकते हैं।