ऐसे पता करें असली और नकली पावर बैंक का फर्क

नई दिल्ली(7 मई): मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल के बाद पावर बैंक साथ में रखना लोगों के लिए आम हो गया। अगर आप कहीं ऐसी जगह जाते हैं जहां बिजली न हो और न फोन को चार्ज करने की सुविधा हो, और आपके पास पावरबैंक है तो आपकी समस्या खत्म। लेकिन मार्केट में अब नकली पावरबैंक की भरमार है और असली व नकली की पहचान करना मुश्किल होता जा रहा है।मेट्रो स्टेशन के बाहर, फुटपाथ पर और इलेक्ट्रॉनिक बाज़ारों में आप धोखा खा सकते हैं। ऐसे में पावरबैंक खरीदने से पहले कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं ताकि आप नकली पावर बैंक खरीदकर ठगी का शिकार न बन जाएं।जानें कैसे करें असली और नकली पावर बैंक में फर्क..- सबसे पहले देखें कि पावर बैंक पर ब्रैंड का नाम लिखा है या नहीं। अगर कोई ब्रैंड नहीं दिख रहा है तो पावर बैंक नकली है। यानी कंपनी का नाम नहीं लिखा है और सिर्फ पावर बैंक ही लिखा दिख रहा है तो आप नकली पावर बैंक खरीद ठगी का शिकार बन गए हैं।- ध्यान रहे कि अगर नकली पावर बैंक का वज़न हल्का होता है। 5000 एमएएच क्षमता वाले नकली पावर बैंक भी हाथ में लेने पर हल्का ही लगता है। इसलिए पावर बैंक खरीदते समय उसके वज़न का ध्यान रखें। अगर 5000 एमएएच की बैटरी होगी तो ज़ाहिर है कुछ तो वज़न होगा ही।- अगर आप बाज़ार में 5000 या 10000 एमएएच वाला पावर बैंक खरीदते हैं तो उसका वज़न काफी भारी रहता है। यानी हल्का मतलब नकली पावर बैंक।- इसके अलावा नकली पावर बैंक बहुत ज्यादा कम कीमत पर बेचे जाते हैं। अगर कोई पावर बैंक, जिस पर जानी-मानी कंपनी का जिक्र है और वो बहुत सस्ते में बिक रहा है तो यह अलार्मिंग है कि आप नकली पावर बैंक खरीदने जा रहे हैं।- ध्यान रहे कि बाज़ार में मौज़ूद अधिकतर कंपनियों के पावर बैंक 5000एमएएच, 10000 एमएएच या 20000 एमएएच क्षमता के साथ ही आते हैं। अगर आपने बाज़ार से 100000 एमएएच या 500000 एमएएच का पावर बैंक ऑफर किया जा रहा है तो समझ जाइये कि आपके हाथों में नकली पावर बैंक है।