पुलेला गोपीचंद: बैडमिंटन के 'द्रोणाचार्य' ने ऐसे बनाया अपने शिष्यों को 'अर्जुन'

- डॉ. संदीप कोहली

नई दिल्ली (19 अगस्त): “जब मैं सन्यास लूंगा तब मैं बहुत खुशी महसूस करूंगा, मैं जो करना चाहता था, वह मैं कर चुका हूं। इन बच्चों के अंदर वह क़ाबलियत है कि वे आगे जाकर मेडल जीत सकते हैं। जब मेरा कोई तारीफ करता है तो मैं खुश होता हूं और जब मेरा कोई आलोचना करता है तो मैं उसे चुनौती के रूप में लेता हूं और अपने काम के जरिये जवाब देता हूं” कुछ साल पहले भारत के सबसे बेहतरीन बैडमिंटन कोच पुल्लेला गोपीचंद ने एक इंटरव्यू के दौरान यह कहा था। ऐसे देते हैं पुल्लेला गोपीचंद अपने स्टूडेंटस् को ट्रेनिंग...

- हैदराबाद में गोपीचंद की बैडमिंटन अकेडमी में पीवी सिंधु और श्रीकांत जैसे प्लेयर्स लंबे समय से ट्रेनिंग ले रहे हैं।  - गोपीचंद सबसे ज्यादा ध्यान शटलर्स की फिटनेस पर देते हैं।  - प्लेयर्स को बाहर से पानी पीने तक की इजाजत नहीं होती है।  - उन्होंने अपने एकेडेमी में ब्रेड और शुगर को पूरी तरह से बैन कर रखा है।  - प्लेयर्स के साथ प्रैक्टिस कर सकें इसलिए खुद गोपीचंद भी 8 महीने से कार्बोहाइड्रेट बढ़ाने वाले प्रोडक्ट्स से दूर रहे। - गोपीचंद ने प्रैक्टिस के लिए खुद अपना सात किलो वजन कम किया था। - गोपीचंद सुबह 4 बजे अकेडमी में आ जाते हैं और 7 बजे तक प्रैक्टिस करवाते हैं। - दिन में 1.5 घंटे के पांच सेशन होते हैं। - एक इंटरव्यू के दौरान गोपीचंद की पत्नी लक्ष्मी ने एक खुलासा किया था। - गोपीचंद कभी-कभी देर रात अपने टेनिस अकादमी पहुंच जाते थे - यह देखने के लिए कि उनके शिष्य कैसे रह रहे हैं।

सिंधु को अग्रेशन बढ़ाने के लिए कहा चिल्लाओ... - गोपीचंद शटलर्स को उनके अग्रेशन बढ़ाने के लिए चिल्लाने की यह आदत डलवाते हैं।  - सिंधु जो एक शांत खिलाड़ी थी उनका अग्रेशन बढ़ाने के लिए गोपीचंद ने एक नायाब तरीका अपनाया था। - गोपीचंद ने एक दिन सिंधु को प्रैक्टिस के दौरान बैडमिंटन कोर्ट के बीच में खड़ा दिया।  - चारों ओर 50 से ज्यादा खिलाड़ी और कोच खड़े थे, गोपी ने कहा कि अब जोर से चिल्लाओ।  - सिंधु तैयार नहीं थीं, तब गोपीचंद ने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया तो मैं तुम्हें कभी रैकेट नहीं छूने दूंगा।  - सिंधु रो पड़ीं, लेकिन फिर वो खुलकर चिल्लाईं, इसके बाद से वे घंटों अकेडमी में खुलकर चिल्लाती थीं।

सिंधु को चोट से उभारने के लिए किया डॉक्टर का काम... - जनवरी 2015 में सिंधु के पैर में चोट लग गई थी। - पहले कहा गया कि माइनर इंजरी है। - लेकिन फरवरी 2015 में सिंधु की हालत बेहद खराब हो गई। - सिंधु के लिए बैडमिंटन कोर्ट तक चलना भी मुश्किल हो गया था। - ऐसे में पुल्लेला गोपीचंद ने सिंधु की चोट ठीक करने के लिए डॉक्टर बन गए। - कभी साइकेट्रिस्ट की भूमिका निभाई तो कभी बन गए फिजियोथेरेपिस्ट। - सिंधु को कुर्सी पर बैडमिंटन कोर्ट के बीच बिठा कर प्रेक्टिस करवाई। - साथ ही चोट को ठीक करने के लिए सिंधु के पैर की घंटों मालिश की। - चोट से उभरने के बाद सिंधु ने वर्ल्ड क्लास प्रदर्शन दिया।