पाकिस्तान में कितने 'कश्मीर'

अजीत कुमार तिवारी

आतंक, अलगाववाद, दहशतगर्दी और आजादी, ये वो शब्द हैं जो कश्मीर का नाम लेते ही दिमाग में विचरण करने लगते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पाकिस्तान में ऐसे कितने कश्मीर जहां लोग सालों से आजादी को लेकर आवाज बुलंद किए हुए हैं। जी हां, कश्मीर वहां भी है, बस नाम अलग है। कहीं उसका नाम बलूचिस्तान हो जाता है, कहीं सिंध, कहीं गिलगित-बल्तिस्तान तो कहीं फाटा। ये इलाके तो आजाद पाकिस्तान में हैं लेकिन यहां के लोग घुट-घुट कर गुलामी की जिंदगी जीने पर मजबूर हैं।

पाकिस्तान का 'कश्मीर' है गिलगित-बाल्टिस्तान पाकिस्तान का ये इलाका पीओके यानी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आता है, जिसे भारत अपना हिस्सा मानता है। यह पूरा इलाका 85,793 वर्ग किमी. में फैला है। यह इलाका चीन और अफगानिस्तान से भी सटा हुआ है। 1970 में इसके दो भाग हो गए, जिसमें से एक को पाकिस्तान आजाद जम्मू और क्शमीर के नाम से और दूसरे को गिलगित-बाल्टिस्तान कहता है। 

यहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी सत्ता में है। इसके बावजूद यहां पाक सेना द्वारा अपहरण, उत्पीड़न और हत्याएं की जाती रही हैं। यही कारण है  कि यहां की जनता आजादी के लिए आवाज बुलंद किए हुए है। ये आजादी चाहते हैं, क्योंकि यहां पर लोगों के साथ उनकी सरकार ही जानवरों की तरह बर्ताव करती है। यहां पाकिस्तान के रहने वाले लोग ही नौकरी के हकदार हैं। आवाज उठाने पर उन्हें पुलिस की लाठियां खानी पड़ती हैं। हाल के दिनों में वहां लोगों पर हो रहे जुल्म की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब शेयर की गईं। जिससे पता चलता है कि पाकिस्तानी सरकार वहां लोगों के साथ हैवान जैसा सलूक करती है।

(तस्वीर:- पाकिस्तान में सिंध का इलाका) 

पाकिस्तान का दूसरा 'कश्मीर' सिंध सिंध पाकिस्तान में बसा दूसरा कश्मीर है। 14 अगस्त को जहां पूरे पाकिस्तान में आजादी का जश्न मन रहा था तब यहां उस दिन को काला दिवस के रूप में मनाया गया। इसके पिछे सबसे बड़ा कारण है पाक सरकार का लोगों के प्रति दोहरा रवैया। दरअसल, यहां रह रही आबादी में ज्यादातर लोग हिंदू हैं। पाकिस्तान सरकार और फौज के लिए यहां के हिंदू किसी जानवर की तरह हैं। जिन पर जुल्म ढाने में पाकिस्तान अपनी शान समझता है। पाकिस्तान के सबसे समृद्ध इलाकों में होने के बावजूद भी यह सबसे पिछड़ा है। 

यहां से कच्चे तेल के 75 फीसदी हिस्से का उत्पादन होता है। लेकिन यहां के लोगों को कल्याणकारी योजनाओं और विकास के नाम पर कुछ नहीं दिया जाता। हिंदू लड़कियों का अपहरण करवाकर उनका जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करवाया जाता है। 'Movement For Solidarity And Peace' की एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में हर साल लगभग 300 हिंदू लड़कियों का अपहरण होता है। हिंदू लड़कियों की जबरदस्ती शादी करवाकर उनसे इस्लाम कबूल करवाया जाता है। हालात ऐसे हैं कि यहां मुसलमान हिंदू लोगों को आसानी से अपने घर किराए पर नहीं देते। इसके लिए उन्हें अक्सर झूठ बोलकर और मुस्लिम नाम रखकर मकान हासिल करते हैं। यही कारण है कि यहां के लोग आजादी की मांग करने लगे हैं।

(तस्वीर:- फाटा में पाक सरकार के खिलाफ सड़क पर लोग) 

पाकिस्तान का तीसरा 'कश्मीर' फाटा  पाकिस्तान के फाटा में रह रहे लोगों की हालत भी भारत के कश्मीर से अलग नहीं है। यहां भी लोग अपने ही देश पाकिस्तान के खिलाफ संघर्ष करने पर मजबूर हैं। यहां संघर्ष का कारण अन्य जगहों से अलग है। यहां आतंक को सह देने वाली पाक सेना खुद ही आतंकियों से लड़ाई लड़ रही है। आतंक को निर्यात करने वाला पाकिस्तान यहां तालिबान से लड़ रहा है। इस बीच यहां रहने वाले लोग इस लड़ाई की भेंट चढ़ने को मजबूर हैं। 

यहां आए दिन तालिबानी आतंकी स्थानीय लोगों को निशाना बनाते हैं। उन्हें लूटते हैं और बर्बर तरीके से उनपर अत्याचार करते हैं। इसी कारण लोगों में आक्रोश है और वो समय-समय पर अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। 

(तस्वीर:- बलूचिस्तान में आजादी के लिए आंदोलने करते लोग)

पाकिस्तान का चौथा 'कश्मीर' बलूचिस्तान बलूचिस्तान में आजादी की मांग पाकिस्तान के बनने से पहले का माना जाता है। लेकिन इसमें तेजी 2006 से देखने को मिली, जब बलोच के कबायली नेता नवाब अकबर बुगती की हत्या कर दी गई। इस हत्या ने यहां के लोगों में भड़की आग को और हवा दे दी। जिसके बाद से यहां आजादी की मांग ने जोर पकड़ लिया। 

यहां के लोग पाकिस्तान से किसी भी हालात में अलग हो जाना चाहते हैं। हालांकि, पाकिस्तान वहां के हालात का जिम्मेदार भारत को मानता है। लेकिन वहां के नेता खुद इस बात को खारिज करते हैं। बलोच नेता नायला कादरी  के मुताबकि भारत का बलूचिस्तान में कोई दखल नहीं है। वो बताते हैं कि उनकी आजादी की मांग अंग्रेजों के दौर से ही है। रोज होने वाली आतंकी घटनाएं, लूटपाट और अत्याचार के कारण यहां के लोग तेजी से पलायन करने लगे हैं। जो हिंदु हैं वो भारत की तरफ रुख करते हैं वहीं अन्य समुदाय के लोगों ने  यूरोप और अमरीका का रुख किया है। 

पाकिस्तान में पंजाब प्रांत को छोड़ दें तो उसके लगभग सभी सूबों में लोग आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान को भारत के कश्मीर से ज्यादा परेशानी देश के अंदर बसे कई कश्मीर के टूटने की है। लेकिन ये पाकिस्तान है कि अपने देश की हालात को देखता तक नहीं!