#BoycottChineseProducts: कैसे आपके बेडरूम से बाथरूम तक पहुंच गया #MadeInChina

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (3 अक्टूबर): आज चीन का बना सामान पूरी दुनिया के बाजारों में छाया हुआ है, चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक देश बन गया है। अमेरिका, अफ्रीका, अरब, यूरोपियन यूनियन और भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर बन गया है चीन। भारत की मार्केट चीनी उत्पादों से पटी पड़ी है। शायद ही ऐसी कोई दुकान या मॉल हो जहां चीनी प्रोडेक्ट आपको ना दिखें। आज हम आपको बता रहे हैं कि कैसे आपके बेडरूम से बाथरूम तक पहुंचा 'Made in China' पहुंच गया है...  

- भारत-चीन के बीच व्यापारिक रिश्ते की शुरुआत 1978 में हुई थी। - लेकिन करीब एक दशक पहले भारत में चीनी उत्पादों की बाढ़ आई थी।  - 'Made in China' सामान जो टिकाऊ और मजबूत न सही, लेकिन सस्ता जरूर होता है। - सस्ता होने से कारण व्यापारियों और आम जनता में चीनी सामान पहली पसंद बन गया। - चीन का थोक उत्पादन पर बल और भारत की उत्पादन क्षमताओं में कमियां इसकी जिम्मेदार थीं। - साथ ही चीन में 46 फीसदी स्किल वर्कस मौजूद हैं जबकि भारत में सिर्फ 2 फीसदी ही हैं। - 1993 में चीन ने मुद्रा अवमूल्यन किया जिस कारण दूसरे देशों को उत्पाद सस्ते में मिलने लगे। - बाद में चीन ने अपनी करेंसी को मजबूत तो किया लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में अब भी कम है। - चीन अब इलेक्ट्रॉनिक सामानों तक ही सीमित नहीं था,बाथरूम से बेडरूम तक प्रोडक्ट बनाने लगा। - दीवाली, होली, रक्षाबंधन जैसे प्रमुख त्योहारों पर Made in China सामान की मार्केट भर गए। - देश के सबसे बड़े होलसेल मार्केट सदर बाजार में चीनी उत्पादों की बाढ़ सी आ गई । - डेढ़ दशक पहले तक इस बाजार में चीनी सामान की हिस्सेदारी 30% थी, जो आज 60-70% है। - खिलौने, साइकिल, टीवी, कैलकुलेटर, घड़ियां, पंखे, ताले, बैटरियां, साइकिल, ऑटो पार्ट से लेकर। - देवी-देवताओं की प्रतिमाओं, फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं भारत मार्केट में उपलब्ध हैं। - ‘यूज एंड थ्रो’ की जो संस्कृति चीन में रही, वही आदात चीन ने भारत की जनता को लगा दी। - इसकी मार कमजोर देसी उत्पादकों पर पड़ी घड़ी, खिलौना, साइकिल उद्योग बर्बादी के कगार पर आ गए।  - कई छोटी इकाइयों पर तो ताला ही पड़ गया, जबकि बड़ी इकाइयां दूसरे उपाय तलाशने लगी। - चीनी निर्यात पर भारत की निर्भरता को सबसे बेहतर उदाहरण ऊर्जा क्षेत्र है।  - आज भारतीय परियोजनाओं के लिए करीब 80 फीसदी पावर प्लांट उपकरण चीन से मंगाए जाते हैं।

भारतीय उद्योग को लगाई चीनी कंपनियों ने चपत - ब्रांड कंपनियों का 25 हजार रुपए में मिलने वाला मोबाईल चीनी ब्रांड में मात्र 10 हजार में मिल जाता है।  - इतना ही नहीं, खिलौने, मूर्तियां, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक जैसे चीनी उत्पाद काफी सस्ते में उपलब्ध हैं।  - होली के मौके पर चीनी रंगों, पिचकारी और स्प्रिंकल्स की भी भारत में भरमार रहती है। - भारतीय रंग की तुलना में चीनी रंग और पिचकारी 60 फीसद तक सस्ते रहते हैं।  - भारत के रंगों से जुड़े 75 फीसद कारोबार पर चीन ने कब्जा कर लिया है। - चीनी पटाखों के कारण शिवकाशी का पटाखा उद्योग बर्बादी के कगार पर आ चुका है - देश में पटाखों का कारोबार करीब 6,000 करोड़ रुपये का है।  - जिसमें से अकेले चीनी पटाखों ने करीब 1000 करोड़ रुपये पर कब्जा कर लिया है। - सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज की मानें तो सॉफ्टवेयर और संगीत क्षेत्र में धड़ल्ले से चीनी नकली माल बिक रहा हैं।  - फिल्मों में 6500 करोड़ रूपए का तो किताबों में 319 करोड़ का नकली कारोबार है। - ऑटो सेक्टर में 8300 करोड़ रूपए का तो सॉफ्टवेयर में 2 लाख करोड़ का नकली माल बिक रहा है। - पिछले साल ऑनलाइन कारोबार के जरिये बेचे गए 40 फीसद चीनी प्रोडेक्ट की गुणवत्ता घटिया और नकली थी।

चीनी बाजार में भारत की पहुंच आसान नहीं - भारत भी चीनी मार्केट में लगातार अपने फार्मास्युटिकल, कृषि और आईटी सेवाओं की आसान पहुंच की मांग करता रहा है। - लेकिन भारत के लिए दवा, आईटी और एग्री कमोडिटीज के चीन को निर्यात में सबसे बड़ी बाधा नॉन टैरिफ बैरियर रही है। - CII के अनुसार चीन ने अपने यहां ऐसे नियम बना रखे हैं कि भारतीय कम्पनियों या तो वहां मिलने वाले ठेकों के लिए योग्य ही नहीं मानी जाती। - चीन के कुछ राज्यों में स्थानीय कंपनियों को सब्सिडी दी जाती है जिससे भारतीय कम्पनियां लागत ज्यादा होने से प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाती हैं। - भारत ने डब्ल्यूटीओ में चीन के खिलाफ भारतीय मीट के आयात पर प्रतिबंध के फैसले पर भी सवाल खड़े किए थे।  - भारत चीन को 40 प्रतिशत लौह-अयस्क निर्यात करता है, अन्य निर्यात वस्तुओं में प्लास्टिक के उत्पाद, इस्पात, रसायन, सोयाबिन तेल हैं। - चीन में कच्‍चे माल पर सब्सिडी दी जाती है, इसलिए चीनी बाजार भारत से ताबड़तोड कच्‍चा माल खरीदता है। - चीन ने यीवू शहर में दुनिया का सबसे बड़ा होलसेल मार्केट बनाया।  - यूएन और वर्ल्ड बैंक जैसी संस्थाएं भी इसे स्मॉल कमोडिटी का सबसे बड़ा होलसेल मार्केट मान चुकी हैं।  - यहां सात लाख से ज्यादा दुकानें हैं, दुनियाभर के इंपोर्टर यहां आते हैं और अपने सामान का ऑर्डर देते हैं।  - चीन ने ऐसे कई बाजार बनाए हैं जहां पर कोई भी इंपोर्टर जाए और नमूना देखकर ऑर्डर दे सके।  - वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम competitiveness रैंकिंग में दुनिया में चीन 25 और भारत 55वें नंबर पर है।