जानिए, क्या होता है शहीदों के शवों पर लिपटे तिरंगे का, कब किया जाता है नष्ट

नई दिल्ली (25 जनवरी): आन, बान और शान के प्रतीक तिरंगे से जुड़ी ऐसी कई बातें हैं जिन्हें आमतौर पर लोगों को पता नहीं होता। जैसे शहीदों के शवों पर लिपटे तिरंगे का क्या होता है या फिर कब इसे नष्ट किया जाता है या कब इसे सभी को फहराने की इजाजत मिली या फिर कब इसे झुकाया जा सकता है... 

तो आईए जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब...

क्या होता है शहीदों के शवों पर लिपटे तिरंगे का  देश की सुरक्षा के लिए हुए शहीदों व देश की महान शख्सियतों के शवों पर भी उन्हें सम्मान देने के लिए तिरंगे को लपेटा जाता है। इस दौरान केसरिया पट्टी वाला हिस्सा सिर की तरफ एवं हरी पट्टी वाला हिस्सा पैरों की तरफ रखा जाता है ताकि सिर से लेकर पैर तक सफेद पट्टी चक्र सहित आए और केसरिया और हरी पट्टी दाएं-बाएं हों। शहीद या विशिष्ट व्यक्ति के शव के साथ ध्वज को जलाया या दफनाया नहीं जाता, बल्कि मुखाग्नि क्रिया से पहले या कब्र में शरीर रखने से पहले ध्वज को हटा लिया जाता है।

कब किया जाता है तिरंगे को नष्ट  जब तिरंगा अमानक, बदरंग कटी-फटी स्थिति में हो तो झंडे को फहराया नहीं जाता। अतः जब कभी ध्वज ऐसी स्थिति में हो तो गोपनीय तरीके से सम्मान के साथ उसे जला दिया जाता है या फिर वजन बांधकर पवित्र नदी में जल समाधि दे दी जाती है। यही प्रकिया पार्थिव शरीरों पर से उतारे गए ध्वजों के साथ भी होती है।    तिरंगे को कब झुकाया जाता है  भारतीय संविधान के अनुसार जब किसी राष्ट्र विभूति का निधन होता है व राष्ट्रीय शोक घोषित होता है, तब कुछ समय के लिए ध्वज को झुका दिया जाता है। लेकिन सिर्फ उसी भवन का तिरंगा झुका रहेगा, जिस भवन में उस विभूति का पार्थिव शरीर रखा जाता है। जैसे ही उस विभूति का पार्थिव शरीर अंत्येष्टि के लिए बाहर निकाला जाता है, वैसे ही ध्वज को पूरी ऊंचाई तक फहरा दिया जाता है।

कब हुआ सबका तिरंगा  26 जनवरी 2002 को भारतीय ध्‍वज संहिता में संशोधन किया गया और स्‍वतंत्रता के कई वर्ष बाद भारत के नागरिकों को अपने घरों, कार्यालयों और फैक्‍ट‍री में न केवल राष्‍ट्रीय दिवसों पर, बल्कि किसी भी दिन बिना किसी रुकावट के इसे फहराने की अनुमति मिल गई। अब भारतीय नागरिक राष्‍ट्रीय झंडे को शान से फहरा सकते हैं, बशर्ते कि वे ध्‍वज संहिता का कठोरतापूर्वक पालन करें और तिरंगे की शान में कोई कमी न आने दें।