बुरहान वानी के मारे जाने की इनसाइड स्टोरी, सेना ने जब घेरा तो नशे में था

श्रीनगर (11 जुलाई) : सुरक्षाकर्मियों की कार्रवाई में आतंकवादी कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने को लेकर पूरी घाटी उबाल पर है। प्रदर्शनों के बाद घाटी के अधिकांश हिस्से कर्फ्यू की चपेट में हैं। बुरहान वानी जैसा चालाक आतंकी आखिर कैसे फंस गया सेना के जाल में, इस पर मिशन में शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी ने पूरी कहानी बतायी है।   

अधिकारी ने बताया कि 8 जुलाई की शाम आर्मी कैंप में इनफॉर्मेशन आई कि बुरहान वानी कोकरनाग के पास बमडूरा गांव के एक मकान में है। उसके पास ज्यादा हथियार नहीं हैं। सूचना पक्की थी। खुद इंटेलिजेंस और आर्मी ने वानी को उस गांव में लाने का प्लान बनाया था। वानी को उसकी एक गर्लफ्रेंड के जरिए बुलाया गया था। वानी अपने साथी सरताज के साथ ही चलता था। सरताज का फोन खुफिया एजेंसियों की रडार पर था। उस दिन भी वानी अपने दोस्त सरताज और परवेज के साथ ही था।

पूरी तरह से कन्फर्म होने के बाद आर्मी ने 100 जवान और पुलिस एसओजी के 35-36 जवानों के साथ मिलकर कोकरनाग इलाके में डबल लेयर का घेरा डाल लिया। सीधे फायरिंग करने के बजाय इलाके के जिस घर में बुरहान वानी छिपा था, वहां पीछे से आग लगाई गई। आग लगते ही वानी और उसके साथी बाहर भागे। वानी उस वक्त नशे में था। उससे भागते भी नहीं बन रहा था। परवेज और सरताज ही उसका हाथ पकड़े हुए थे।

मौका देख जवानों ने उसे घेर लिया। वानी कुछ कहता या करता, इससे पहले ही महज चार फीट की दूरी से उसे गोलियां मार दी गईं।

जवानों का पहला टारगेट सिर्फ वानी था। बाकी के दो आतंकियों को जिंदा पकड़ने का प्लान था, लेकिन परवेज और सरताज की तरफ से हरकत होते देख जवानों ने उन पर भी ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं।

तीनों का खात्मा हो चुका था। जवानों ने फौरन तलाशी ली। वानी के पास उस समय सिर्फ एक पिस्टल थी।वो आमतौर पर वह बुलेटप्रूफ जैकेट और कॉम्बेट ड्रेस पहने रहता था। लेकिन उस दिन वह सिविलियन कपड़ों में था।