इस दिशा में रखें घर का पूजा मंदिर, घर-परिवार हमेशा रहेगा खुशहाल !

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (17 जून): वास्तुशास्त्र के अनुसार जब घर में पूजा-स्थान का विशेष महत्व होता है। घर में भगवान की पूजा हो या फिर गुरु की आराधना इस सब के लिए वास्तुशास्त्र में एक खास स्थान नियत है। वास्तु की दृष्टि से जब घर का पूजा घर की दिशा सही हो तो घर में सब शुभ ही शुभ होता है। क्योंकि वास्तुशास्त्र में देवताओं के लिए भी एक दिशा निश्चित है। इसलिए वास्तु के अनुसार घर का मंदिर यदि सही दिशा में है तो घर में सभी कुशल मंगल रहते हैं।

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वास्तु शास्त्र के मुताबिक आज हम आपको बताते है कि किस दिशा में मंदिर की स्थापना करना चाहिए तथा किस दिशा में देवी-देवता की की मूर्ति होना शुभ फल प्रदान करने वाला होता है। वहीं अगर घर का पूजा मंदिर वास्तु के दृष्टिकोण से सही नहीं है तो घर-परिवार की खुशहाली में संकट खड़ा हो जाता है। वास्तु के अनुसार हम आपको बता रहे हैं कि घर का पूजा मंदिर या स्थल किस दिशा में होना सर्वोत्तम है। जिससे घर में सदैव खुशियां बनी रहती है।temple

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मंदिर निर्माण स्थापना की दिशा - घर या दुकान का ईशान कोण यानि की उत्तर-पूर्व दिशा। इस दिशा को मंदिर के निर्माण के लिए सबसे उत्तम माना गया है।मूर्ति स्थापना की दिशा- घर के मंदिर में देवी-देवताओं की मूर्तियां या उनकी तस्वीर की स्थापना पूर्व या उत्तर दिशा में होना शुभ होता है।temple

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 - यदि घर के मंदिर में श्री हरी भगवान विष्णु, श्री कृष्ण, सूर्य देव और कार्तिकेय की तस्वीर या मूर्ति है तो उनका मुख हमेशा पश्चिम दिशा में होना चाहिए। ये दिशा इन देवी-देवताओं के लिए शुभ माना जाता है। - यदि घर के मंदिर में भगवान हनुमान की मूर्ति हो तो उनकी तस्वीर या मूर्ति का मुख नैऋत्या अर्थात दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए। ये शुभ माना जाता है।- भगवान श्री गणेश, कुबेर, देवी लक्ष्मी, तथा नवग्रह की स्थापना मंदिर में इस प्रकार करनी चाहिए की उनका मुख दक्षिण दिशा की ओर हो। ये दिशा इन देवी-देवताओं के लिए उत्तम है।temple

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