इलाज का पैसा न मिलने पर मरीज को बंधक नहीं बना सकते अस्पताल !

नई दिल्ली (27 अप्रैल): दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि अस्पताल किसी भी पेशेंट को बिल पेमेंट न होने के आधार पर रोक नहीं सकता। याचिकाकर्ता का आरोप है कि राजधानी दिल्ली के एक नामी प्राइवेट अस्पताल ने उसके पिता को रोक रखा है इस मामले में याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में हेबियस कॉर्पस की अर्जी दाखिल की है। हाई कोर्ट के जस्टिस विपिन सांघी की अगुवाई वाली बेंच ने पेशेंट को रिलीज न करने का जो तरीका अपनाया गया वह निंदनीय है। बिल का पेमेंट न किए जाने पर पेशेंट को रोके जाने पर कोर्ट ने कहा कि इस तरह का तरीका नहीं अपनाया जा सकता। अगर कोई बिल पेमेंट नहीं कर पाया तो पेशेंट को रोक नहीं सकते।


 आप मरीज को बंधक नहीं बना सकते। ये तरीका नहीं हो सकता। अगर इलाज का बिल आउटस्टैंडिंग है तो भी बिल की वसूली के लिए मरीज को नहीं रोका जा सकता। अदालत ने अस्पताल को निर्देश दिया है कि वह डिस्चार्ज समरी तैयार करे और मरीज के बेटे को इस बात की इजाजत दे कि वह अपने पिता को वहां से ले जा सकें।दिल्ली सरकार के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल राहुल मेहरा ने बताया कि उनकी तरफ से दलील दी गई कि किसी भी मरीज को इस तरह से बिल न देने के नाम पर रोका नहीं जा सकता। तब डॉक्टर सर गंगाराम अस्पताल की ओर से दलील दी गई कि मरीज के रिश्तेदार मेडिकल अडवाइस के खिलाफ ले जाना चाहते हैं। तब राहुल मेहरा ने दलील दी कि किसी भी पेशेंट को इस तरह से रोका नहीं जा सकता। फैमिली मेंबर अगर ले जाना चाहते हैं तो उसे कैसे रोका जा सकता है।