अपने हुस्न के जाल में फंसाकर वसूलती थी लाखों, पुलिस से लेकर रिपोटर तक था शामिल

केजे श्रीवत्सन, जयपुर (11 जनवरी): जयपुर ब्लैकमैलिंग केस में अब पुलिसवालों की भूमिका भी सामने आने लगी है। इस कांड के आरोपियों के साथ मिलकर रईसों को लूटने वाले एक पुलिसवाले को भी जांच एजेंसी ने गिरफ्तार किया है। यह पुलिसवाला महिलाओं को बाहरी राज्यों से यहां लाने और आरोपियों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखता था। करीब 40 करोड़पतियों से 25 करोड़ रुपये की उगाही के इस ब्लैकमैलिंग कांड में अब तक 2 युवतियों सहित कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।


पिछले हफ्ते इस केस में एक NRI युवती की गिरफ़्तारी के बाद अब एक पुलिसवाला भी सामने आया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एक मर्डर में मामले से जुड़े आरोपी से पूछताछ के दौरान इस मामले का खुलासा हुआ। अब तक 2 लड़की सहित 10 आरोपियों की गिरफ़्तारी हो चुकी है। आरोपी राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल है, जिसका नाम हरिकिशन चौहान है। हरिकिशन मामले की जांच कर रही SOG मुख्यालय घाट गेट के पास ही स्थित पांचवीं बटालियन में तैनात था। अब तक की जांच में हरिकिशन की दो मामलों में बड़ी भूमिका सामने आई

है।


मुख्य आरोपी नवीन देवानी को जब एक मामले में गिरफ्तार करके अदालते में पेशी पर लाया जा रहा था तो गाडी में दोनों के दौरान बातचीत हुई। जिसके बाद नवीन जमानत पर छूटा और हरिकिशन के संपर्क में रहा। आरोपियों ने उर्मिला नाम की एक महिला के जरिए कांस्टेबल हरिकिशन को अपने साथ कर लिया और इसी युवती के जरिए उसकी जान पहचान उत्तराखंड की ब्लैकमैलिंग कांड में शामिल युवतियों से हुई। यह भी पता चला है की हरिकिशन ने नवीन के इशारे पर एक फैक्ट्री मालिक और होटल मालिक को फंसाने के नाम पर दस-दस लाख रुपये वसूले।


जयपुर में तैनात यह कांस्टेबल तीन साल से गैंग के संपर्क में था और उत्तराखंड से अपनी परिचित महिला के माध्यम से युवतियां लाकर देता था। हर मामले में कांस्टेबल हरिकिशन को एक-एक लाख रुपये मिलने लगे, जबकि जिस्म का सौदा करने के लिए लाई जाने वाली युवतियों को केवल 15 से 20 हजार रूपये ही दिए जाते थे।


ऐसे हुआ खुलासा...

मामले का खुलासा उस वक़्त सबसे पहले हुआ जब जयपुर में एक हिस्ट्रीशीटर हिम्मतसिंह का मर्डर होता है। मर्डर के आरोप में आनंद शांडिल्य नामक आदमी को 12 दिसंबर 2016 को गिरफ्तार किया जाता है। 12 दिनों तक चलने वाले क़ानूनी दांव पेंच के दौरान ही लड़कियों द्वारा रसूकदारों को ब्लैकमेल कर शॉर्टकट से मोटी रकम कराने की पूरी कहानी का खुलासा होता है। पुलिस की माने तो साधना नाम की एक लड़की शिप्रा पथ थाने में महिला उत्पीड़न का मामला दर्ज कराती है। साधना का वकील नितेष बंधु और आरोपी लड़के का वकील नवीन देवानी थाने

पर मिलते हैं। इस बीच अक्षत शर्मा और कैमरामैन विजय टीवी रिपोर्टर बनकर आते हैं और ये कथित मीडियाकर्मी टीवी पर न्यूज देने के बहाने लड़के के परिजनों को धमकी देते हैं। फिर साधना को लड़के की ओर से 14 लाख रुपए मिलते हैं। बस यहीं से शुरू होती है गैंग बनाने की प्लानिंग।


इस गैंग में बाहरी राज्यों की लड़कियों के साथ एक रवनीत कौर नाम की एक एनआरआई लड़की भी आई। पढ़ने के लिए जयपुर आई रवनीत आर्थिक तंगी के कारण नौकरी की तलाश कर रही थी और देखते ही देखते रवनीत 35 प्रतिशत के शेयर में गैंग की सदस्य बन गई। वह खुद भी मोटे लोगों को अपने हुस्न के जाल में फसती थी।


पहला शिकार:

इस गैंग का पहला टारगेट आनद शांडिल्य की पहचान वाला एक बिल्डर बना। फरवरी साल 2014 में रवनीत कौर के साथ गोल्फ क्लब में मीटिंग कराई गई। फ्लैट का सौदा करते हुए दोनों की गहरी दोस्ती की और योजना के अनुसार फिजिकल रिलेशन बनाए। फिर शुरू हुई वकीलों की भूमिका जिसने बिल्डर के खिलाफ इस्तगासा पेश किया और उसके पूरी तरह जाल में फ़साने के बाद इन्होंने 35 लाख वसूले।


दूसरा शिकार:

मई 2014: ईएनटी डॉक्टर से 1.40 करोड़ लिए...

इस केस में भी मुख्य किरदार आनंद शांडिल्य। गिरोह की एक लड़की कान की समस्या लेकर पहुंचती है। दोस्ती, बार-बार मिलना। वाट्सएप पर चेटिंग। इलाज के दौरान दूरी और नजदीकी में बदली। फिर शुरू हुआ वकील के इस्तगासा दायर करने और मीडियाकर्मी के धमकी देने का खेल। यहां डिमांड दो करोड़ रुपए से शुरू होती है। 1.40 करोड़ रुपए पर सेटलमेंट। जिसके बाद लड़की फिर कोर्ट में इस्तगासे के बयान से मुकर जाती है।


तीसरा शिकार:

जून 2014: फिर बिल्डर और 50 लाख वसूले...

इस बार गैंग से जुडी एक लड़की डिस्को थेक जाती है, जहां बिल्डर से दोस्ती करती है। दो दिन तक डिस्को थेक में मिलते हैं। तीसरे दिन बिल्डर के साथ उसके फार्म हाउस पर पहुंचती है। फिर इस्तगासा होता है। मीडियाकर्मी अक्षत-विजय की धमकी सामने आती है। आनंद शांडिल्य की ओर से सेटलमेंट की राशि होती है 50 लाख रुपए। लेकिन इस बार इस पुरे खेल में अब चार वकील और एक ड्राइवर की भी एंट्री होती है। इनमें नितेष का दोस्त अखिलेश मिश्रा, संदीप गुप्ता, जूनियर आलोक और विक्रम तथा ड्राइवर राकेश यादव।


चौथा शिकार

प्रोपर्टी व्यवसायी फंसाया, 80 लाख की वसूले...

लड़की एनआरआई बनकर मानसरोवर के प्रोपर्टी व्यवसायी से प्रोपर्टी खरीदने के लिए संपर्क करती है। प्रोपर्टी डीलर की कार में दो दिन तक प्रोपर्टी देखने के लिए घूमती है। दो दिन में ही दोस्ती कर होटल में कमरा बुक कराया जाता है और फिर बनते हैं दोनों के बीच संबंध। फिर वही कहानी दोहराई जाती है। इस बार सेटलमेंट की राशि 1 करोड़ रुपए से कम होकर केवल 80 लाख तक कम होती है।


पांचवां शिकार

एक्पोर्टर को फंसाया, 23 लाख में छोड़ा...

गैंग से जुड़ी एक नई लड़की अपने आप को NRI बताकर जवाहर नगर के एक्सपोर्टर से नौकरी मांगने जाती है। एक्सपोर्टर नौकरी दे देता है। लड़की चौथे दिन ही एक्सपोर्टर को जाल में फंसा लेती है। कार में होटल में जाने की बनती है प्लानिंग। दूसरे दिन ही इस्तगासा पेश होता है। 50 लाख रुपए की डिमांड से शुरू होने वाली बात आनंद शांडिल्य 23 लाख रुपए सेटल कराता है।


छठा शिकार

रिसोर्ट मालिक के बेटे को फंसाकर वसूले 45 लाख...

अब प्लानिंग लड़की खुद बनाती है। अलवर के एक रिसोर्ट के मालिक के बेटे से इवेंट के बहाने मिलती है। रिसोर्ट मालिक के लड़के के साथ उसी की कार में घूमती है। बहाना बनाकर उसके रिसोर्ट में ही रुकती है। अखिलेश मिश्रा रिसोर्ट मालिक को फोन करके उसके बेटे पर दुष्कर्म का आरोप लगाता है। एक करोड़ रुपए में सेटलमेंट की बात शुरू होती है और मामला 45 लाख रुपए में सेटल होता है।


इस मामले अब तक आनंद शांडिल्य, अक्षत शर्मा उर्फ सागरपुरी, विजय, अखिलेश, पुष्पेंद्र, राकेश, कैलाश, विमल, कल्पना उर्फ रिया, कांस्टेबल हरिकिशन सहित कुल 10 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं जबकि इस पुरे गैंग का मास्टरमांइड सरगना एडवोकेट नवीन देवानी, एडवोकेट नीतेश बंधु, एडवोकेट संदीप, विक्रम, अलोक, सुनील और तीन युवतियां अभी फरार हैं।