NEWS 24 Exclusive: लोगों को घर दिलाने के 3 रास्ते


नई दिल्ली (17 अगस्त): धोखेबाज बिल्डरों के खिलाफ न्यूज 24 लगातार मुहिम चला रहा है। हम आपको बताने जा रहे हैं कि न्यूज 24 की खबर का बड़ा असर सामने आया है। हमारी मुहिम का ही नतीजा है कि केन्द्र और यूपी सरकार इस मामले में बेहद सख्त हो गई है। न्यूज 24 ने देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली के सामने लोगों के आशियाने का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। इसके बाद केंद्र सरकार ने भरोसा दिया है कि सरकार आम लोगों को उनका घर दिलवा कर रहेगी।

जेपी इंफ्राटेक के दिवालिया होने की खबरों के बीच लोगों को अपनी जिंदगी भर की कमाई डूबने का खतरा मंडराने लगा था। न्यूज 24 लगातार धोखेबाज बिल्डरों के खिलाफ मुहिम चला रहा है। आपको आपका घर जल्द से जल्द दिलाने के लिए हर बड़े, छोटे और धोखेबाज बिल्डर के खिलाफ हमने जंग छेड़ ऱखी है।

आज हम आपको बताने वाले हैं कि कैसे लोगों को उनका आशियाना मिल सकता है...

पहला विकल्प:
- जिन प्रोजेक्ट का 50 से 60 फीसदी काम पूरा हो चुका है, उन प्रोजेक्ट्स को कोई सरकारी कंपनी जैसे एनबीसीसी या फिर हुडको अपने अधिन लेकर प्रोजेक्ट पूरा करे। बैंक इन प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए धन मुहैया कराएं। प्रोजेक्ट को पूरा करने के बाद होमबायर्स को उनका घर मिल जाये और फिर बैंक अपना पैसा निकाल लें।

दूसरा विकल्प:
- लोगों को घर दिलाने का दूसरा रास्ता है कि ऐसे एसेट्स जो इंसोल्वेंसी कानून के अंदर आयेंगे उन्हें बेचकर उससे मिलने वाले पैसों से अधूरे बने प्रोजेक्ट्स को पूरा किया जाए।

तीसरा विकल्प:
- तीसरा फार्मूला जिसपर सरकार गौर कर रही वो ये कि किसी थर्ड पार्टी या बिल्डर को प्रोजेक्ट दे दिया जाए और वो बिल्डर या कंपनी इन हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को पूरा करे। पर इसके लिए बॉयर्स से मंजूरी लेनी होगी। हालांकि इस फार्मूले में सरकार को डर है कि इसने भी प्रोजेक्ट लटका दिया तो फिर क्या होगा।

लोगों के आशियाने के लिए योगी सरकार क्या कर रही है। ये सवाल सबसे अहम सवाल है, क्योंकि नोएडा और ग्रेटर नोएडा के इलाके जहां सबसे ज्यादा बिल्डरों के प्रोजेक्ट आधे अधूरे पड़े हैं। वे यूपी सरकार के अधिन ही आते हैं।

ऐसे लोगों को अनका आशियाना दिलाने के लिए योगी सरकार क्या कर रही है आपको बताते हैं...

- 16 अगस्त को नोएडा अथॉरिटी ने 30 बिल्डरों के साथ बैठक की है।
- 18 अगस्त को अथॉरिटी-बिल्डरों की दूसरे चरण की बैठक है।
- इस बैठक में एक बेहद अहम मसले पर सहमती बन सकती है।
- दरअसल अब तक नोएडा अथॉरिटी प्रोजेक्ट के टॉवरों का कंप्लीशन सर्टिफिकेट देती रही है। लेकिन अगर फ्लैट के आधार पर कंप्लीशन सर्टिफिकेट देने पर सहमति बन जाए तो लोगों को जल्दी फ्लैट मिलने का रास्ता साफ हो सकता है।